मुजफ्फरपुर : जिले की कुढ़नी विधानसभा सीट महागठबंधन और भाजपा नेतृत्व के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है। यह वर्ष 2015 जैसे मुकाबले वाली ही पिच है।
करीब सात वर्ष की बिहार की राजनीति में कई बदलाव के बाद कहानी फिर वहीं से शुरू हो रही है। महागठबंधन समर्थित जदयू उम्मीदवार मनोज कुशवाहा फिर मैदान में हैं।
वहीं दूसरी ओर भाजपा से भी फिर केदार प्रसाद गुप्ता ही उतरे हैं। तब केदार गुप्ता ने बड़े अंतर से बाजी मारी थी। 2020 के विधानसभा आम चुनाव में जदयू और भाजपा साथ मैदान में उतरे।
सीटिंग होने के कारण केदार भाजपा के उम्मीदवार बने। मनोज कुशवाहा बिना लड़े मैदान से बाहर हो गए। केदार भी सीट नहीं बचा सके। महज 712 वोटों से उनकी हार हुई।
अब उपचुनाव ने दोनों को आमने-सामने कर दिया है। सीटिंग होने के बावजूद राजद ने जदयू के लिए सीट छोड़ी है। ऐसे में मनोज कुशवाहा पर भरोसा कायम रखने का दबाव रहेगा।
उनके लिए बड़ी राजनीतिक लड़ाई होगी। केदार गुप्ता के लिए भी यह लड़ाई लॉटरी की तरह है, क्योंकि वे पांच साल बाद लड़ाई में उतरने की सोच रहे थे। इन लड़ाई में कई और खिलाड़ी अहम होंगे।
वीआइपी निलाभ कुमार को मैदान में उतारने की घोषणा कर चुकी है। कुढ़नी के लोकप्रिय विधायक रहे साधु शरण शाही के परनाती हैं। मुकेश सहनी भाजपा का खेल दो तरह से बिगाड़ना चाह रहे हैं।
अपनी जाति के साथ महत्वपूर्ण भूमिका वाले भूमिहार वोटों का बिखराव कर सकते हैं। दूसरी ओर मनोज कुशवाहा के लिए अपनी जाति के साथ राजद के एमवाय समीकरण वाले परंपरागत वोटों को एकजुट करने की चुनौती होगी। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने मो.गुलाम मुतुर्जा को मैदान में उतारा है। इससे माय समीकरण पर असर पड़ने की उम्मीद है।
