मुजफ्फरपुर : मुजफ्फरपुर सहित सूबे के थानों में दम तोड़ रही आपराधिक मामलों में जब्त की गई लावारिस वाहनों की सूची तैयार होगी। फिर उसे नियमानुसार नीलाम करने की योजना है।
सिर्फ मुजफ्फरपुर जिला में तकरीबन दो हजार से अधिक वाहन लावारिस स्थिति में है। इसे लेकर बिहार पुलिस मुख्यालय ने मामले की समीक्षा करते हुए मुजफ्फरपुर सहित सूबे के सभी जिला कप्तानों से थानों में पड़ी जब्त लावारिस वाहनों की सूची मांगी है।
सूची प्राप्त होने के बाद उसकी नीलामवाद की प्रक्रिया पुलिस जिला प्रशासन की मदद से नीलामी प्रक्रिया की जाएगी। मालूम हो कि, आपराधिक मामलों में जब्त दो से लेकर 10 पहिया तक वाहन की नीलामी दो दशक से अधिक से नहीं हुई है।
पुलिस द्वारा जब्त वाहनों को थाना और ओपी में रहने की व्यवस्था नहीं है। इस वजह से थाना के बाहर या फिर सड़क व एनएच किनारे खुले आसमान के नीचे वाहन लगा दिया जाता है।
कुछ वाहनों के पाटर्स-पुर्जा की भी चोरी हो जाती है। लेकिन, इस संबंध में पूछने वाला कोई नहीं है। पुलिस पदाधिकारियों की मानें तो थानों में 30 से 40 साल पहले की भी जब्त गाड़ियां है, इसका कोई रिकॉर्ड थाना स्तर पर नहीं है।
ऐसे वाहन को खोजना और केस से मिलान करना काफी मुश्किल काम है। बताया गया कि कई थानों पर जब्त गाड़ी पंजी भी नहीं है।
इनमें से अधिकांश वाहन जर्जर और पुरानी है। बस उसका अवशेष बचा है। बाकी को पार्ट्स सड़ गल गया है। जानकारी के मुताबिक, थानों में पड़ी वाहनों की सूची तैयार होगी।
फिर उसे थाना में अंकित केसों से मिलान कराया जाता है फिर संबंधित वाहन मालिक को नोटिस दिया जाएगा। मालिक के नहीं आने की सूरत पर उसे नीलामवाद के लिए जिलाधिकारी के नीलामवाद शाखा में प्रस्ताव भेजा जाएगा।
जहां से एमवीआइ उक्त वाहन का भौतिक सत्यापन करते हैं और उसका मूल्यांकन करते है, फिर उसके हिसाब से उसकी कीमत तय होती और तय समय पर एक साथ बोली लगती है। अधिक बोली वाले को वाहन सौंप दिया जाता है। इस आधार पर डीडीओ कार्यालय में उसका नया रजिस्ट्रेशन होता है।

