गया. बिहार के गया जिले में वैसे बच्चों को नई जिंदगी मिलने लगी है जो देख और चल सकते हैं लेकिन सुन नहीं सकते. ऐसे बच्चों की जिंदगी में जान डालने के लिए गया जिले के जिलाधिकारी डॉ० त्यागराजन एस०एम० ने विशेष कार्यक्रम शुरू किया है, जिसका नाम श्रवण श्रुति है. इस कार्यक्रम तहत 5 वर्ष से छोटे बच्चों का निःशुल्क इलाज करवाया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक श्रवण श्रुति कार्यक्रम के तहत गांव-गांव में कैंप लगाकर बच्चों के सुनने की क्षमता की जांच होती है. इस जांच के बाद जिन बच्चों में इयररिंग लॉक की समस्या पाई जाती है, ऐसे बधिर बच्चों को इलाज के लिए पटना और कानपुर भेजा जाता है.
इस कार्यक्रम के तहत सभी प्रकार के जांच और इलाज के लिए होने वाला खर्च सरकार देती है. कई ऐसे बच्चे हैं जिनमें इस सप्ताह कैम्प में जांच के दौरान हियर लॉस पाया गया है, वो सुन नहीं सकते हैं. इन सभी बच्चों को जिला प्रशासन के सहयोग और देखरेख में इनके कॉकलियर इंप्लांट हेतु कानपुर भेजा जा रहा है. इन बच्चों के साथ उनके माता-पिता और एस० एन० मल्होत्रा ई एंड टी फाउंडेशन कानपुर के असिस्टेंट मैनेजर को साथ में रखा गया है. इलाज के लिए भेजे जा रहे इन सभी बच्चों के रहने और खाने की पूरी व्यवस्था जिला प्रशासन करवाती है.
जिला पदाधिकारी गया डॉक्टर त्यागराजन एसएम के मुताबिक श्रवण श्रुति कार्यक्रम के तहत जिन बच्चों को सुनने की क्षमता कम है, वैसे बच्चों को जांच करा उनके इलाज के लिये बाहर भेजा जा रहा है. वैसे बच्चे जो बचपन में ही कम सुनते हैं या 5 साल से कम उम्र वाले बच्चे को पहले चिन्हित करके उनका इलाज करवाया जा रहा है. जिलाधिकारी त्यागराजन की मानें तो कानपुर के एक संस्थान के साथ एग्रीमेंट किया गया है और उसी के तहत सैकड़ो बच्चों का इलाज पहले भी कराया गया है. फिर कई बच्चे अच्छी सुविधा के साथ आज ही कानपुर भेजे जा रहे हैं.




