अब बिहार की इस नदी में डॉल्फिन की अठखेलियां; मगर पर्यावरणविदों की बढ़ गई चिंता! जानें क्यों

बगहा. हरहा नदी में डॉल्फिन (मछली) देखी गई है. यह नदी गंडक नदी की सहायक नदी है. स्थानीय लोगों की मानें तो डॉल्फिन पिछले 3 दिनों से मलपुरावा ब्रिज के पास दिखाई दे रही है. इस दुर्लभ मछली के देखा जाना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है.

हरहा  नदी में अठखेलियां करती डॉल्फिन (News18 Hindi)

आम लोग डॉल्फिन को अठखेलियां करते हुए लोग देख रहे हैं. हालांकि, वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) के फील्ड ऑफिसर पावेल घोस के अनुसार यह जगह गंगे डॉल्फिन के लिए सुरक्षित जगह नहीं है. वाल्मीकि नगर के बगहा रेंज के रेंजर सहित एक्सपर्ट समेत डॉल्फिन पर काम करने वाले लोगों को शामिल कर एक टीम गठन की गई है. डॉल्फिन को रेस्क्यू कर गंडक नदी में छोड़ा जाएगा.

दुनिया के सबसे पुराने जीवों में से एक
गंगा-डॉल्फ़िन दुनिया के सबसे पुराने जीवों में से एक है. कछुए, मगरमच्छ और शार्क की तरह. हालांकि, गंगा-डॉल्फिन की आधिकारिक तौर पर खोज 1801 में हुई थी. इसे स्थानीय भाषा में सोंस बुलाया जाता है. ह्वेल मछली की तरह स्तनधारी जलीव जीव है. यह बेहद आकर्षक देखने वाली होती है. यह पानी में 990 फीट गहराई तक जा सकती है और पानी से 20 फीट उपर तक उछल सकती है. भारत सरकार ने इस जलजीव को 1972 में भारतीय वन्य जीव संरक्षण कानून के दायरे में शामिल किया था.

गंडक में 2017-18 में डॉल्फिन पर हुआ था स्टडी
वाल्मीकिनगर से लेकर सोनपुर तक 2017-18 में डॉल्फिन पर स्टडी की गई थी. इस दौरान 155 से 160 के करीब में डॉल्फिन की संख्या निकल कर सामने आई. VTR में डॉल्फिन की मौजूदगी के चलते इसके संरक्षण के लिए नदी में वैसे विस्तृत जलीय इलाके की तलाश की जा रही है, जहां कम से कम बाहरी रुकावट हो. इसके संरक्षण क्षेत्र से गांव काफी दूर हो और यहां किसी तरह का बाहरी हस्तक्षेप नहीं रहे. इसके लिए पटना में रिसर्च इंस्टीट्यूट बनाया गया है. गंडक का पानी दूसरी नदियों की तुलना में अधिक साफ है. जिसके कारण इसमें घडियाल, मगरमच्छ, डॉल्फिन और कछुअे वगैरह बढ़ते ही जा रहे हैं.

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