रोहतास. सासाराम सदर प्रखंड के नहौना पंचायत की पंचायत समिति सदस्य रूपा कुमारी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. ऐसे में पंचायत के कुछ लोगों ने उनके निर्वाचन पर ही सवाल खड़े किए हैं. जिसको लेकर रूपा कुमारी के मायका नोखा प्रखंड के छितौना पंचायत के डुमरा गांव से बनी जाति प्रमाण पत्र को नोखा के अंचलाधिकारी ने रद्द कर दिया है. जिसके बाद विवाद गहरा गया.

दरअसल निर्वाचित पंचायत समिति सदस्य रूपा कुमारी ने जिस डुमरा गांव को अपना मायका बताते हुए जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था. उस गांव के लोगों तथा परिजन का कहना है कि रूपा नोखा के छितौना पंचायत के डुमरा गांव के ही रहने वाली है, यहां रूपा का मायका हैं. चुकी भूमिहीन होने के कारण उनके माता-पिता रोजगार के सिलसिले में पिछले कई दशक से झारखंड में एक रिश्तेदार के यहां रहे हैं. जबकि उनका तमाम रिश्तेदार अभी भी छितौना में ही है.
क्या कहते हैं स्थानीय वार्ड सदस्य
गांव के वार्ड सदस्य ने रूपा कुमारी को अपनी बुआ बताते हैं. गांव के पंचायत समिति सदस्य रंजन कुमार का कहना है कि रूपा कुमारी का मायका डुमरा गांव में ही है. रूपा कुमारी रिश्ते में उसकी ‘बुआ’ लगती है. कुछ दशक पहले ही रोजगार के सिलसिले में रूपा कुमारी के माता-पिता झारखंड में जाकर काम धाम करने लगे. चुकी डुमरा गांव में वह भूमिहीन थे और बिहार सरकार की जमीन पर रहते थे. लेकिन आज भी उनका रिश्तेदार-पाटीदार डुमरा गांव में ही रहते हैं. ऐसे में मूल रूप से रूपा कुमारी का मायका गुमरा ही है. पंचायत समिति सदस्य रंजन कुमार ने रूपा कुमारी के जाति प्रमाण पत्र को रद्द करने की बात को गलत ठहराते हैं.
क्या कहते हैं अंचलाधिकारी
इस संबंध में नोखा के अंचलाधिकारी सुमन कुमार ने बताया गया कि जाति प्रमाण पत्र रद्द करने से पूर्व संबंधित जनप्रतिनिधि को तीन बार नोटिस जारी किया गया. जिसका कोई जवाब नहीं मिलने पर ही कार्रवाई की गई. अंचलाधिकारी का कहना है कि उन्होंने अपने स्तर से जांच की है. जिसमें पाया गया है कि रूपा कुमारी कहार जाति से है. लेकिन, उनके माता-पिता संबंधित गांव में नहीं रहते हैं. ऐसे में BDC रूपा कुमारी के निर्वाचन को ही चुनौती दी गई हैं. उधर रूपा कुमारी इस पूरे मामले को लेकर पटना उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है.




