मकर संक्रांति 14 को है या 15 को अगर इस बात पर आप कंफ्यूज हो रहे हैं, तो कंफ्यूज होने की जरूरत नहीं है. इस मामले पर पूर्णिया के ज्योतिषाचार्य पंडित श्री दया नाथ मिश्र ने जानकारी देते हुए बताया इस बार मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को नहीं मना कर 15 जनवरी को मनाया जाएगा.हिंदू धर्म के मान्यता के अनुसार है , मकर संक्रांति का पर्व बहुत ही सुखदाई होता है. ऐसा कहा जाता है इस दिन स्वर्ग के द्वार खुल जाते हैं ऐसे में जो व्यक्ति मकर संक्रांति के दिन गंगा में स्नान करते हैं. उनके सभी पाप धुल जाते हैं. उन्हें मृत्यु उपरांत मोक्ष की प्राप्ति होती है. साथ ही इस मानव जीवन में भी उनके साथ काफी सुखदाई पल गुजरता है.

…तो इस वजह से 14 को नहीं मनेगी मकर संक्रांति
जानकारी देते हुए ज्योतिषाचार्य पंडित दयानाथ मिश्र ने कहा कि हिंदू पंचांग के अनुसार 14 जनवरी दिन शनिवार को सूर्य देव रात के 8:14 पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे. इसी वजह से लोगों में मकर संक्रांति की तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है, तो इसपर पंडित जी कहते हैं की मान्यता अनुसार कोई भी शुभ कार्य सूर्योदय के कारण शुभ और फलीभूत माना जाता है, लेकिन 14 जनवरी को रात्रि के 8:14 पर जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे, तो इस समय में लोग स्नान दान धर्म के कार्य वर्जित होते हैं. इसलिए 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर्व मनाना सही नहीं होगा.

मकर संक्रांति का पर्व को मनाने के लिए उदया तिथि का होना आवश्यक:
पंडित दयानंद मिश्र ने कहा इस बार का मकर संक्रांति पर्व खास तौर पर कई वर्षों के बाद रविवार को पड़ रहा है. जो अपने आप में काफी फलदाई और सुखदाई माना जाता है. मकर संक्रांति में भगवान सूर्य की विशेष रूप से पूजा आराधना की जाती है. उनके विशेष दिन रविवार पड़ रहा है. जिससे इस त्यौहार का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है. क्योंकि यह वार सूर्य देव को ही समर्पित है.

मकर संक्रांति के लिए पुण्य काल का समय होगा सुबह 7:15 से शाम 5:46 तक
पंडितजी ने जानकारी देते हुए बताया उदया तिथि के चलते अगले दिन यानी 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति पर्व मनाया जाए. वही 15 जनवरी को मकर सक्रांति पर्व के लिए शुभ समय एवं फलदाई समय सुबह के 7:15 से लेकर शाम के 5:46 तक रहेगा. इस अवधि में लोग स्नान दान के कार्य अगर करते हैं तो वह अति शुभ माना जाता है.




