असर की रिपोर्ट के आंकड़े आए सामने, भाषा और गणित के ज्ञान में बेटियां निकलीं बेटों से आगे

पटना : राज्य की बेटियों ने भाषा और गणित के मामले में बेटों को पीछे छोड़ दिया है। 2018 की असर की रिपोर्ट में कक्षा पांच में पढ़ने वाले 43 प्रतिशत छात्रों ने कक्षा दो स्तर की भाषा में पूछे गए सवालों का जवाब दिया था। यह 2022 में 42 प्रतिशत हो गया।

वहीं, 2018 में 39.8 प्रतिशत छात्राओं ने जवाब दिया था। यह 2022 में बढ़कर 42.7 प्रतिशत हो गया है। वहीं, कक्षा आठ के 75.1 प्रतिशत छात्रों ने जवाब दिया था, जो घटकर 71.4 प्रतिशत हो गया। वहीं, छात्राओं का जवाब 2018 में 68.5 प्रतिशत था, जो बढ़कर 70.9 प्रतिशत हो गया है।

गणित के ज्ञान में बेटियों का ग्राफ बेटों से ज्यादा ऊंचा है। कक्षा पांच के छात्रों से कक्षा दो के गणित के प्रश्न पूछे गए थे। 2018 में 34.7 प्रतिशत छात्र व 25.7 प्रतिशत छात्राओं ने जवाब दिया था। यह 2022 में क्रमश: 37.4 व 33.4 प्रतिशत हो गया है।

वहीं, कक्षा आठ के 66 प्रतिशत छात्र व 49.8 प्रतिशत छात्राओं ने जवाब दिया था। यह क्रमश: 62.1 और 57 प्रतिशत हो गया है। इन चार वर्षों में कक्षा आठ में छात्राओं का प्रतिशत जहां 7.2 प्रतिशत बढ़ा है, वहीं छात्र 3.9 प्रतिशत घटे हैं।

पिछले 12 सालों में छात्राओं के लिए 45.7 प्रतिशत स्कूलों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। राज्य के कुल 63.8 प्रतिशत स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालय की व्यवस्था है। 11.3 प्रतिशत स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग से शौचालय की सुविधा नहीं है।

राज्य के 87.3 प्रतिशत प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में पेयजल की सुविधा उपलब्ध है। 4.8 प्रतिशत में कोई सुविधा नहीं है। 2014 और 2018 की तुलना में पेयजल उपलब्धता का अंकड़ा घटा है। सर्वे के दिन 86.8 प्रतिशत स्कूलों में मध्याह्न भोजन परोसा गया था। इनमें से 86.4 प्रतिशत स्कूलों में रसोई उपलब्ध थी।

असर-2022 का सर्वे ग्रामीण क्षेत्र के कक्षा एक से आठ तक सरकारी और निजी स्कूलों में किया गया। इसमें तीन से 16 और पांच से 16 वर्ष के बच्चों को शामिल किया गया। सभी कक्षा के छात्रों से गणित, हिंदी व अंग्रेजी में कक्षा दो स्तर के प्रश्न पूछे गए। राज्य के सभी 38 जिलों में सितंबर से नवंबर के बीच सर्वे हुआ।

राज्य के कक्षा एक से आठ तक के 92.5 प्रतिशत स्कूलों में बिजली का कनेक्शन है। सर्वेक्षण के समय 84.7 प्रतिशत स्कूलों में बिजली उपलब्ध भी थी। 2018 में सिर्फ 69.5 प्रतिशत स्कूलों में ही बिजली कनेक्शन थी। कंप्यूटर के मामले में राज्य के स्कूल फिसड्डी हैं। 92.4 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा नहीं है। जबकि 2018 में 96.6 प्रतिशत स्कूल के बच्चों को इसका लाभ मिल रहा था। 6.1 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर है, लेकिन छात्र उपयोग नहीं कर रहे।

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