‘दस फीसदी आरक्षण वाले अंग्रेजों के थे दलाल… घंटी बजाना था काम’, बिहार सरकार के मंत्री अलोक मेहता के ये कैसे बोल

भागलपुर: बिहार सरकार के राजस्व मंत्री आलोक मेहता ने दस फीसदी आरक्षण पाने वाले को अंग्रेजों का दलाल बताया है। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि ये लोग अंग्रेजों के जमाने में मंदिरों में घंटी बजाते थे। आलोक मेहता शनिवार को भागलपुर में गोराडीह प्रखंड के सालपुर पंचायत अंतर्गत काशील हटिया मैदान में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ‘जगदेव बाबू ने दलित, शोषित, पिछड़े और वंचितों के उत्थान की लड़ाई लड़ी, जिनकी हिस्सेदारी 90 प्रतिशत है। उन्हें समाज में कोई सम्मान नहीं मिलता था।राजस्व मंत्री आलोक कुमार ने कहा- बिहार में मार्च 2024 तक पूरा होगा भूमि  एरियल सर्वे का काम - the work of land aerial survey will be completed in  bihar by march 2024-mobileवहीं जो आज दस फीसदी आरक्षण वाले हैं, उन्हें अंग्रेजों ने जाते वक्त सैकड़ों एकड़ जमीन देकर जमींदार बना दिया। जबकि मेहनत, मजदूरी करने वाले आज तक भूमिहीन बने हुए हैं। आलोक मेहता यहीं नहीं रुके उन्होंने यहां तक कह दिया कि ‘जिन्हें आज 10 फीसदी आरक्षण में गिना जाता है वह पहले मंदिर में घंटी बजाते थे और अंग्रेजो के दलाल थे।’ मंत्री आलोक मेहता का इशारा आर्थिक आधार पर मिलने वाले आरक्षण (ईडब्ल्यूएस) में शामिल लोगों के लिए था। बाद में उन्होंने खुलेआम ईडब्ल्यूएस आरक्षण के खिलाफ भी बोला है। उन्होंने कहा कि दस प्रतिशत आरक्षण दलित और शोषित तबकों के लिए उचित नहीं है। आने वाले समय में यह आरक्षण पर खतरा है।’

ईडब्ल्यूएस आरक्षण पर आरजेडी कर रहा है विरोध, जेडीयू का समर्थन!

ईडब्ल्यूएस आरक्षण के मुद्दे पर राजद हमेशा से विरोध में रहा है। जबकि सीएम नीतीश समेत उनकी पार्टी जेडीयू इसके समर्थन में है। वहीं केंद्र में बीजेपी को भारी बहुमत के कारण आरजेडी का विरोध छोड़ा पड़ गया है।

विवादित बयानबाजी में अव्वल आने की होड़ मची

बिहार की राजनीति में इन दिनों महागठबंधन के अंदर विवादित बयानबाजी में अव्वल आने की होड़ मची हुई है। इससे पहले बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री ने रामचरितमानस को लेकर सवाल उठाया था। उसके बाद जदयू के पूर्व एमएलसी ने शहर को कर्बला बना देने की बात कही। अब एक और मंत्री ने अगड़े समाज पर निशाना साधते हुए यह कह दिया कि 10प्रतिशत आरक्षण वाले अंग्रेजों के दलाल थे। सवाल अब सीएम नीतीश पर भी उठने लगा है कि अपने बिगड़ैल मंत्री को अनुशासन का पाठ पढ़ाने में वह खुद क्यों फिसड्डी साबित हो रहे हैं।

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