मुजफ्फरपुर : आखिरकार वहीं हुआ, जिसकी आशंका पहले से थी। निगम बोर्ड की पहली बैठक में ही शनिवार को मेयर निर्मला साहू और डिप्टी मेयर डॉ. मोनालिसा के बीच तल्खी खुलकर सामने आ गई। डिप्टी मेयर ने मीटिंग की तारीख व एजेंडा तय करने में उपेक्षा का आरोप लगाते हुए मेयर को खरी- खोटी सुना दी।
मेयर के अभिभाषण के बाद डिप्टी मेयर ने सीधे उन्हें घेरा। कहा कि निर्मला जी ने छोटी बहन कहा और जब भी बुलाया तब गई। पर बिना पूछे सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों का नाम तय हो गया। यह उनका अधिकार था। मुझसे या किसी पार्षद से विचार-विमर्श किए बिना ही बोर्ड की बैठक की तारीख और एजेंडा भी तय कर दिया गया। अखबारों के जरिए जानकारी मिली। यह राजतंत्र नहीं लोकतंत्र है।
मैं पूछना चाहती हूं कि क्यों नहीं बुलाया गया ? मजबूर होकर हमें भी पेपर के जरिए बयान व एजेंडा देना पड़ा। एमएलसी दिनेश सिंह ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया। कहा कि पहली बैठक है। इस तरह तू-तू मैं- मैं कीजिएगा तो क्या मैसेज जाएगा? यह मीटिंग की बात नहीं है। इसे आपस में बैठ कर सुलझाइए। ऐसे कीजिएगा तो आपके साथ नगर व जिला का नुकसान होगा। सम्मान के साथ सभी से राय विचार करना चाहिए। अपने क्षेत्र की समस्या रखिए व समाधान मांगिए।
अध्यक्ष जिसका नाम कहें, वही बोलें तभी अधिकारी भी सुनेंगे। बैठक का माहौल उस समय गरमा गया, जब वार्ड 42 की पार्षद अर्चना पंडित की ओर से जल शाखा के पाइपलाइन इंस्पेक्टर धर्मेन्द्र कुमार को हटाने की बात कही गई। आबेदा हाइस्कूल से दक्षिण एक साल से क्षतिग्रस्त जलापूर्ति पाइप का मामला उठाते हुए पार्षद ने कहा कि मरम्मत की बात कहने पर पाइपलाइन इंस्पेक्टर सामान मांगते हैं। पार्षद कहां से सामान देगा।
इंस्पेक्टर को उस इलाके से हटाइए। इस पर नगर आयुक्त ने कहा कि आप किसी को हटाने के लिए नहीं बोल सकतीं। आपको अधिकार नहीं है। अपना काम कहिए। इस पर नगर विधायक विजेंद्र चौधरी भड़क गए। नगर आयुक्त से बोले-आपने आपत्तिजनक शब्द बोला है। यह ठीक नहीं है।आप किसी भी पार्षद को अपमानित नहीं कर सकते। हाइकोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए विधायक ने कहा कि बोर्ड के पास कर्मियों के तबादले का अधिकार है।


