पटना. बिहार के सौरवजीत और महाराष्ट्र की करिश्मा की प्रेम कहानी शादी के मुकाम तक पहुंची और अब इनके दो बच्चे भी हैं. साल 2011 की बात है, सौरवजीत मुंबई रेहेबिलिटेशन की ट्रेनिंग करने गए थे. वहीं ट्रेनिंग करने आई करिश्मा से मुलाकात हुई.

उस समय एक-दूसरे से ज्यादा परिचय नहीं हुआ पर उसके बाद दूसरी बार जब फिजियोथेरैपी की ट्रेनिंग के लिए दोबारा मुंबई में दोनों की मुलाकात हुई तब बात आगे बढ़ी. सौरवजीत कहते हैं भगवान दोनों को मिलाने की कोशिश कर रहे थे. दोबारा मिलने पर नजदीकियां बढ़ीं, प्यार हुआ. कोर्स खत्म होते दोनों ने निर्णय लिया कि शादी करेंगे, लेकिन यह इतना आसान नहीं था.
पटना में सौरवजीत एक फिजियोथेरैपिस्ट के साथ फूलों से गुलाल बनाने के प्रोजेक्ट में मैनेजर भी हैं. मुंबई में इन्होंने इसकी ट्रेनिंग ली है और कई दिव्यांगों को रोजगार दे रहे हैं. करिश्मा और सौरव बचपन से भले ही नेत्रहीन हैं, लेकिन अपनी काबिलियत से खुद की पहचान बना रहे हैं और अपने परिवार के साथ सुखद जीवन व्यतीत कर रहे हैं.
जब घर वालों के खिलाफ भागकर की शादी
सौरवजीत बताते हैं कि शादी की बात घरवालों को जब पता चली तो घरेलू ड्रामा शुरू हो गया. करिश्मा के घर वालों का कहना था कि एक बिहारी और एक महाराष्ट्रियन कभी एक नहीं हो सकते. वे इस रिश्ते के खिलाफ थे. करिश्मा बताती हैं उनको बहुत पीटा जाता था, फोन भी छीन लिया गया था और घर से निकलने की भी इजाजत नहीं थी. फिर इस कहानी में बॉलीवुड फिल्म जैसा मोड़ आया.
इसके बाद सौरवजीत ने करिश्मा के घरवालों को खुला चैलेंज देते हुए कहा अपनी बेटी को जहां छुपाना है छुपा लीजिए, 10 दिन में आपकी बेटी को बिहार की दुल्हन बनाकर ले जाऊंगा. और हुआ भी यह कि दस दिन से पहले ही तमाम मुश्किलों के बावजूद सौरव, करिश्मा को भगाकर बिहार ले आए. एक एनजीओ के जरिए इनकी शादी हुई.


