बिहार के कोने कोने में मिलती ही श’राब लेकिन नीतीश बने हैं बेपरवाह … सुधाकर सिंह ने बताया कैसे फेल है श’राबबंदी

पटना. नीतीश सरकार को अक्सर निशाने पर लेने वाले पूर्व मंत्री और राजद विधायक सुधाकर सिंह ने एक बार फिर बिहार में शराबबंदी को पूरी तरह से फेल बताया है. उन्होंने मोतिहारी जहरीली शराबकांड में मुआवजा देने के नीतीश सरकार के निर्णय को सही कहा. इसके पहले भी जब गोपालगंज और छपरा में जहरीली शराब से मौत हुई थी उस समय मैंने विधानसभा में मांग किया था कि पीड़ित परिवारों को सरकार के स्तर पर सहानुभूति दिखानी चाहिए. इसको आपदा मानते हुए चार लाख का मुआवजा दिया जाना चाहिए.

Sudhakar Singh Resigns: नीतीश सरकार को बड़ा झटका, सुधाकर सिंह ने कृषि मंत्री पद से दिया इस्तीफा- जानें वजह | 🇮🇳 LatestLY हिन्दीउन्होंने कहा कि उस समय नीतीश सरकार ने ध्यान नहीं दिया लेकिन अब नीतीश कुमार की सरकार ने इस बात को स्वीकार किया है. इसके लिए सरकार को अब साधुवाद देता हूं कि देर आए दुरुस्त आए. सरकार का जो मौलिक काम है वह लोग कल्याण का है. इससे सरकार अपनी छवि सुधार सकती है और पूरे देश में यह संदेश जाएगा कि बिहार में जो सरकार है और लोक कल्याणकारी है. उन्होंने नीतीश सरकार पर हमलावर होते हुए कहा कि अगर शराब नहीं मिल रहा है तो लोग कैसे मर रहे हैं? पूरे बिहार में शराब उपलब्ध उपलब्ध है. शराब राज्य के कोने कोने में उपलब्ध है. हर जगह इसकी आपूर्ति हो रही है. इसलिए शराबबंदी की समीक्षा करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि शराबबंदी अपने मूल उद्देश्य से भटक चुका है. इसलिए समीक्षा करके इस पर निर्णय लेना होगा कि राजस्व नुकसान और कानून व्यवस्था की परेशानी और माफिया तंत्र का कैसे उदय हुआ है. उन्होंने कहा कि पूरे मामले में सिटिंग जजों की एक समिति बनाकर उनसे रिपोर्ट लेनी चाहिए.

उन्होंने शराबबंदी को अपने उद्देश्यों को पूरी तरह से विफल बताते हुए कहा कि जहरीली शराब से मौतें हर जगह होती हैं. यहां तक कि शराबबंदी वाले गुजरात में भी जहरीली शराब पीने से मौत होती है. बिहार में भी यही हो रहा है. शराबबंदी के कारण एक काली अर्थव्यवस्था की शुरुआत होती है जो राजस्व को नुकसान पहुंचा रही है. इससे लॉ एंड ऑर्डर की समस्या उत्पन्न होती है. उन्होंने कहा कि खाने पीने की चीजें सामाजिक सुधार की चीज है ना की प्रशासनिक व्यवस्था की. लेकिन यहं सामाजिक सुधार के जरिए जो करना चाहिए उसे प्रशासन की लाठी के बल पर आप कर रहे हैं. इसीलिए यह सफल नहीं हुआ है.

पटना के निकट बिहटा में बालू माफियाओं द्वारा पुलिस-प्रशासन पर किए गए हमले का जिक्र करते हुए कहा कि यह दर्शाता है कि माफिया किस तरह से बेखौफ हैं. सुधाकर ने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है. 2 महीने पूर्व भी इसी तरीके से आपसी गैंगवार में उसी इलाके में कई लोग मारे गए थे. उन्होंने कहा कि बालू ओवरलोडिंग के मुद्दे को उन्होंने सरकर के समक्ष उठाया था. कैसे जीटी रोड पर हर दिन हजारों ट्रक ओवरलोड चलते हैं. कैमूर में एनएच 2 पर रोजाना करीब 1000 ट्रक ओवरलोड बालू की खेप गुजरती है. लेकिन सरकार के स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है. इसी का परिणाम है कि बिहटा में बेखौफ माफिया ने इतना बड़ा तांडव मचाया.

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