बागेश्वर बाबा ने बिहार वासियों मांगा दक्षिणा, क्या है धीरेंद्र शास्त्री की डिमांड?

बागेश्वर धाम के पिता दे पंडित धीरेंद्र शास्त्री का बिहार में भव्य स्वागत हुआ। पहले ही दिन पटना एयरपोर्ट पर बाबा के स्वागत में हजारों की संख्या में लोग पहुंच गए । उनकी कथा में इतने लोग आए कि सुविधाओं की कमी हो गई। अपने स्वागत से बागेश्वर सरकार गदगद हो गए और प्रसन्न होकर उन्होंने बिहार और बिहार के संस्कृति की जमकर तारीफ की।  बागेश्वर बाबा ने अब  बिहार के लोगों से कथा सुनाने की एवज में दक्षिणा की मांग की है।

क्या है बाबा की डिमांड। आप नहीं जानते तो हम आपको बताते हैं। 12 मई को बागेश्वर का धीरेंद्र शास्त्री पटना पहुंचे। 13 मई 4:00 से उनकी हनुमंत कथा शुरू हुई। पहले ही दिन की कथा लाखों श्रद्धालु धीरेंद्र शास्त्री का दर्शन करने और उनके मुख से हनुमान कथा सुनने के लिए पहुंच गए। श्रद्धालुओं की संख्या और भी बढ़ रही है।  भक्तों की श्रद्धा को देखते हुए बागेश्वर बाबा ने खुद से कहा कि धन्य है बिहार के लोग और बिहार की संस्कृति। ऐसी दीवानगी कहीं नहीं देखी।

दरअसल पंडित धीरेंद्र शास्त्री बिहार के लोगों लोगों के धर्म अध्यात्म और संतों के प्रति श्रद्धा देख कर आनंदित हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि बिहारी सब पर भारी। बिहार हमारी आत्मा है। कुल मिलाकर धीरेंद्र शास्त्री को बिहार की संस्कृति से काफी खुशी मिली। उन्होंने बिहार के लोगों से दक्षिणा में भी ऐसी ही मांग की है।

सोमवार को तीसरे दिन की कथा के दौरान बिहार वासियों से दक्षिणा मांगा। दक्षिणा में उन्होंने धन-संपत्ति या अपने वैभव विलास के लिए कुछ नहीं मांगा है।  उन्होंने कहा कि आप लोग मुझे एक दक्षिणा दीजिए। आज कथा से संकल्प लेकर जाएं कि बिहार की संस्कृति को ऐसे ही बनाए रखें। बाबा के दक्षिणा की बात सुनकर पंडाल में बैठकर प्रसन्न हो गए। सब ने तालियां बजाकर बाबा द्वारा दक्षिणा मांगे जाने का स्वागत किया। अपनी ओर से बिहार के आध्यात्मिक परंपरा को बनाए रखने का वचन दिया।

शाम को बागेश्वर बाबा के पटना स्थित होटल पनाश पहुंके। वहां भी हजारों की संख्या में भक्त उनके दर्शन के लिए मौजूद थे। थोड़ी देर के बाद धीरेंद्र शास्त्री बाहर।।निकले आरती गाकर भक्तों को आशीर्वाद दिया। श्रद्धालुओं ने यहां भी तालियां बजाकर और जय श्रीराम के नारे लगाकर बाबा का अभिनंदन किया। बागेश्वर बाबा ने फिर लोगों से अपील की है कि पटना से अपने अपने घर चले जाएं और वही से टीवी पर उनके कथा देखें और सुनें।

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