मुजफ्फरपुर: संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली द्वारा आयोजित “अमृत युवा कलोत्सव” में शहर के आकृति रंग संस्थान के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से लोगों को किया मंतमुग्ध। अपनी नई प्रस्तुति “घरौंदा” के साथ रंगमन्दिर, गांधी मैदान, रायपुर, छत्तीसगढ़ में संगीत नाटक अकादमी में कलाकारों द्वारा प्रस्तुति दी गई। दर्शंकों ने कहा कि ऐसा अद्भुत नाटक का मंचन आज से पहले कभी नहीं देखा।
कलाकरों ने कहा कि जब आप अपने शहर से दूर उम्मीदों को लेकर किसी अन्य शहर, राज्य या देश जाते है तो एक अलग सा तनाव रहता है। और वह तनाव आपको कुछ बहुत अच्छा करने को बार-बार मजबूत करता है। मन, आत्मा और शरीर सिर्फ आपको सबसे बेहतरीन करने के तरफ़ इशारा करती है।
और फिर आप हाथ जोड़ कर अपने शहर की आन, बान और शान को बचाए रखने की दुआ करते हैं । लोगों की तारीफ़ सुनकर कलाकारों के चेहरे की हंसी देखते ही बन रही थी। कलाकारों ने दर्शंकों का धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कहा कि ”धन्यवाद मेरे शहर को, शहर के एक-एक व्यक्ति को, उस उम्मीद को जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया है”। धन्यवाद “संगीत नाटक अकादमी” को जिन्होंने मुझे और मेरे साथियों को इस महोत्सव का हिस्सा बनाया।
निर्देशक सुनील फेकनिया ने बताया की किसी भी देश का विकास वहाँ की संस्कृति से और किसी भी संस्कृति का विकास वहाँ की लोक संस्कृति से और इसी लोक संस्कृति से लोक नाट्य और लोक नाट्य से आधुनिक नाट्य का प्रदुर्भाव होता है । इन्ही नाट्य को नज़दीक से जानने, समझने और अपने आप को रंगमंच को समर्पित करने के उदेश्य से चौदह साल की उम्र से ही रंगमंच से जुड़े । इस द्वारा बहुत से नाट्य संस्थान और उनके निर्देशकों के साथ विभिन्न नाटकों मे अभिनय किया । लेकिन, नाट्य और रंगमंच की असल समझ भोपाल “नया थियेटर” के निर्देशक स्वी. हबीब तनवीर सर के नाटक राजरक्त देखने के साथ आया ।
नाटक अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम है, जो किसी वास्तविक या काल्पनिक घटनाओं पर अभिनेताओं द्वारा किया गया उत्कृष्ट प्रदर्शन है । नाटक “घरौंदा” पद्मश्री निरंजन गोस्वामी सर द्वारा लिखित बंगला नाटक “सोनार ग्रामर मेया” का हिन्दी रूपांतरण है । “घरौंदा” एक मूकाभिनय नाटक है जो समाज में पनप रही विभिन्न कुरीतियों मे से एक को दर्शाता है, जिसमे एक लड़की या महिला के प्रति कुछ असमाजिक तत्तों द्वारा अपनाएं गए क्रूर रवैयों से है | जिससे पीड़ित हो कर वह अपने सारे सपने,सारे अरमानों को खत्म कर एक निर्जीव वस्तु बन कर रह जाती है | संवाद विहीन इस नाटक मे यह दर्शाने की कोशिश की गई है कि, जब लड़कियां काम की तलाश में अकेली घर से निकलती है और उसकी एक चूक उसे किस नर्क में धकेल देती है कि कहानी है मूक नाटक “घरौंदा” |


मंच पर प्रस्तुति देने वाले कलाकार :
दुल्हन : राजू सहनी
दूल्हा एवं कोठा मालिक : विजय कुमार
कोठा ग्राहक एवं नृत्य : मुकेश कुमार
सिपाही एवं पतुरिया 1 : अमित कुमार
लड़का एवं पतुरिया 2 : विवेक कुमार
दुल्हन ग्राहक एवं दलाल 1 : अशोक अंदाज
बर्फवाला एवं दलाल 2 : शिवम चंद्रवंशी
देव एवं ग्राहक : संचय

खिलौनावाला एवं ग्राहक : राहुल मौर्य
दुल्हन प्रेमी : दीनबंधु महाजन
नेपथ्य मे …
प्रकाश परिकल्पा एवं संचालन : सिराज अहमद भाटी
सेट एवं रूप-सज्जा : सुजीत कुमार
वस्त्र विन्यास : सूरज कुमार
संगीत : मिलिंद त्रिवेदी
लेखक : पद्मश्री निरंजन गोस्वामी
परिकल्पना एवं निर्देशन : सुनील फेकानिया




