सैकड़ों बगुलों की मौ’त से भ’य का माहौल, वजह अब तक स्पष्ट नहीं

रोहतास : रोहतास जिले के दरिहट और आयर कोठा स्थित पुराने थाना परिसर में पेड़ों को अपना आशियाना बनाए हुए बगुलों की सैकड़ों की संख्या में मौत हो रही है. मासूम बगुलों की लगातार मौत होने से स्थानीय लोग सकते में हैं. दरअसल, जिले मे हीटवेव और भीषण गर्मी के कारण तापमान में हो रही लगातार वृद्धि के कारण मनुष्य तो मनुष्य बल्कि इसका सीधा असर पक्षियों पर भी देखने को मिल रहा है. जिस तरह से जिले में भीषण गर्मी और हीटवेव की वजह से आम जनजीवन त्रस्त है. उसी तरह पेड़ों को अपना आशियाना बनाए बगुला पक्षी भी इस भीषण गर्मी की मार झेल रहे हैं. भीषण गर्मी के कारण तालाब, आहार, पाइन, पोखर सहित नदियों के पानी सूख जाने की वजह से पंछियों के पीने के लिए पानी का अभाव हो गया है.

आफत ही आफत! मुंगेर और आसपास के इलाकों में अब कम दिख रहे किसान मित्र बगुला  ये है बड़ी वजह - OMG, Number of farmer friend heron started decreasing in  Munger andसैकड़ों बगुलों की मौत से भय का माहौल

जिसकी वजह से प्यासे पंछियों की लगातार मौतें हो रही है. हालांकि लोग भी अपने घर के छत के ऊपर गर्मियों में दाना और पानी रखते हैं, लेकिन इसके बावजूद भी इन बगुला पक्षियों को दाना, पानी नहीं मिलने की वजह से अभी तक सैकड़ों बगुला पक्षियों की मौत हो चुकी है. पेड़ों पर बैठे बगुला पक्षी एकाएक पेड़ से नीचे जमीन पर गिरकर छटपटाते हुए अपना दम तोड़ दे रहे हैं. जिसको देखकर स्थानीय लोग भी सदमे में है और लोगों के बीच भी भय जैसा माहौल बन रहा है.

बगुलों की मौत की वजह अब तक स्पष्ट नहीं

स्थानीय लोगों को पक्षियों में अज्ञात बीमारी का भी डर सता रहा है. जिसकी वजह से बगुला पक्षियों की इतनी संख्या में लगातार मौत हो रही है. बगुलों की मौत से लोगों के बीच संक्रमण होने का खतरा सता रहा है. आखिर इतनी बड़ी संख्या में बगुला की मौत या तो भीषण गर्मी, हीटवेव की वजह से हो रही है या फिर कोई अज्ञात बीमारी की वजह से.

ज्यादातर लोग भीषण गर्मी में बगुला पक्षियों को समय पर दाना-पानी नहीं मिलने के कारण भी मौत होने की आशंका जताई जा रही है. हालांकि इस मामले में दरिहट स्थित पशु अस्पताल के डॉक्टर से पूछने पर वरीय अधिकारियों का हवाला देते हुए मामले में कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं. वहीं, स्वास्थ्य विभाग को इस मामले में संज्ञान में लेते हुए लगातार हो रही बगुला पक्षियों की मौत के कारणों का जांच कर पता लगाने की आवश्यकता है. ताकि स्थानीय लोगों के बीच बने भय के माहौल को खत्म किया जा सके और पक्षियों की हो रही मौत को रोका जा सके.

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