बिहार में सिविल सर्जन नहीं कर पाएंगे एएनएम का ट्रांसफर

सीतामढ़ी: बिहार में हर साल जून माह में पदाधिकारी और कर्मचारियों का तबादला होता है। प्रखंड से राज्य स्तर तक तबादला का सिलसिला चलता रहता है। तबादले में ‘सेटिंग-गेटिंग’ का खेल भी खूब चलता है। किसी से यह छुपा हुआ नहीं है। मनचाहा स्थान पर तबादले के लिए सेटिंग चलती है। बहुत सारे सेटिंग में सफल हो जाते है, तो बहुत फेल भी हो जाते हैं। यानी उनकी पैरवी काम नहीं करती है। पैकेट में लक्ष्मी रखे रह जाते हैं।Rajasthan RAS Officers Transfer 40 RAS And Patbastar SDM Transfer List ANN  | RAS Transfer: सचिन पायलट की सभा के बाद बदले गए पतबसर के SDM, 40 RAS  अफसरों की ट्रांसफर लिस्ट जारीअंत में निराशा हाथ लगती है। हालांकि राज्य सरकार के स्तर से सेटिंग गेटिंग के खेल पर नजर भी रखी जाती है। फिर खेल हो ही जाता है। उदाहरण अनेक है। पिछली बार राजस्व विभाग, बिहार, पटना की ओर से बड़े पैमाने पर सीओ का तबादला किया गया था। इसमें गड़बड़ी की खबर के बाद सीएम नीतीश कुमार की ओर से तबादले को रद्द ही कर दिया गया था। इस तरह का खेल जिलों में भी होता है और खूब होता है। संभवत: इसी गड़बड़ी की संभावना को देखते हुए राज्य सरकार ने सूबे के सभी सिविल सर्जन (सीएस) से एएनएम के तबादले का अधिकार छीन लिया है। अब विभाग के स्तर से ही एएनएम का तबादला संभव है।

निदेशक प्रमुख ने किया है सचेत

दरअसल, सूबे के विभिन्न जिलों से एएनएम की ओर से तबादले को लेकर स्वास्थ्य विभाग को आवेदन दिये जा रहे हैं। इसी वजह से निदेशक प्रमुख, नर्सिंग डॉ. अनिल कुमार तिवारी ने सूबे के सभी सीएस और क्षेत्रीय स्वास्थ्य उप निदेशक को पत्र भेजकर आगाह किया है कि विभाग के स्तर से एक जून 23 को ही एएनएम का पद को राज्यस्तरीय कर दिया गया है। इस लिहाज से अब क्षेत्रीय स्वास्थ्य उप निदेशक और सिविल सर्जन एएनएम के तबादले के लिए सक्षम प्राधिकार नहीं है। निदेशक प्रमुख ने जिला स्तर से एएनएम का तबादला नही करने एवं तबादला कर दिया गया हो, तो उसे रद करने का आदेश दिया है।

तबादले में चलता है पैसे का खेल

तबादले में पैसे का खेल खूब चलता है। यह कोई नई बात नही है। आज भी सभी जेहन में यह ताजा है कि तबादले के लिए एक कर्मी से रिश्वत लेते सीतामढ़ी के एक सिविल सर्जन को निगरानी टीम, पटना ने दबोचा था। गत वर्ष कर्मियों के तबादले में गड़बड़ी को लेकर बाजपट्टी विधायक मुकेश कुमार यादव द्वारा शिकायत दर्ज कराई थी। बताया गया है कि तबादले में मुख्य रूप से दो तरह की गड़बड़ी का खेल खेला जाता है। पहला, मनचाहा स्थान पर तबादले की कोशिश रहती है और दूसरा, जहां है वहीं रहने दिया जाए। इसी के एवज में पैसे का खेल होने की बात कही जाती है। गत बार तबादले के दौरान सिविल सर्जन द्वारा एक ही स्थान पर तीन वर्ष से अधिक से कई स्वास्थ्य कर्मियों को ज्यों जा त्यों छोड़ दिया गया है। गंभीर आरोप में फंसे कर्मियों को भी एक तरह से गिफ्ट के तौर पर तबादला से मुक्त रखा गया था, जबकि निर्धारित अवधि पूरा होने के बाद उनका तबादला होना चाहिए था।

 

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