पटना: जिला स्तरीय प्रशिक्षकों ने सीखे एमडीए को सफ़ल बनाने के गुर….

पटना: फाइलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य वर्ष 2030 से घटाकर 2027 कर देश फाइलेरिया उन्मूलन के प्रति गंभीरता एवं प्रतिबद्धता जाहिर कर चुका है. बिहार भी इस दिशा में लगातार कोशिश कर रहा है. राष्ट्र स्तर पर बिहार भी अपनी भूमिका साबित करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से प्रयास में भी जुटा है. देशभर में इस वर्ष 10 फ़रवरी को एक साथ एमडीए राउंड चलाया गया था. बिहार के 24 जिलों में सफलतापूर्वक एमडीए राउंड चलाया गया था. वहीं, आगामी 10 अगस्त से पुनः बिहार के शेष 14 जिलों में एमडीए राउंड चलाया जाना है. जिसमें अररिया, भोजपुर, बक्सर, दरभंगा, किशनगंज, लखीसराय, मधेपुरा, मधुबनी, नालंदा, नवादा, पटना, पूर्णिया, रोहतास एवं समस्तीपुर जिले शामिल हैं. इन 14 जिलों के 4 जिले यानी दरभंगा, लखीसराय, रोहतास और समस्तीपुर में तीन तरह की दवाएं खिलाई जाएगी. जबकि शेष 10 जिलों में 2 तरह की दवाई खिलाई जाएगी. घर-घर जाकर ही लोगों को दवाएं खिलाई जाएगी. उक्त बातें फाइलेरिया के अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. परमेश्वर प्रसाद ने बुधवार को परिवार एवं स्वास्थ्य कल्याण, राज्य स्वास्थ्य समिति के सभागार में आयोजित स्टेट टीओटी के दौरान कही.

शत-प्रतिशत कवरेज पर दें ध्यान

डॉ. परमेश्वर प्रसाद ने कहा कि स्टेट टीओटी का मुख्य उद्देश्य 10 अगस्त से आयोजित एमडीए कार्यक्रम में शत-प्रतिशत योग्य आबादी को फाइलेरिया रोधी दवा सेवन सुनिश्चित कराना है. इसके लिए नाईट ब्लड सर्वे, जिला एवं प्रखंड स्तरीय समन्वय बैठक, गुणवत्तापूर्ण दवा खिलाने वाले स्वास्थ्य कर्मियों का क्षमतावर्धन सहित ससमय सभी आवश्यक गतिविधियों का कुशल क्रियान्वयन जरुरी है. जिसमें यह प्रशिक्षण बेहद कारगर साबित होगा. उन्होंने आगामी एमडीए राउंड की सफलता के लिए डीसीएम को सहयोग करने की अपील की.

एमडीए कार्ययोजना की रणनीति पर हुयी चर्चा

प्रशिक्षण के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्टेट एनटीडी कोऑर्डिनेटर डॉ. राजेश पांडेय ने विस्तार से फाइलेरिया प्रसार एवं इसके उन्मूलन रणनीति पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि देश भर में फाइलेरिया से 16 राज्य एवं 5 केन्द्र शासित प्रदेश के 333 जिले प्रभावित हैं. जिसमें लगभग 65 करोड़ लोग इस रोग के संक्रमण को प्राप्त करने के ख़तरे में हैं. वहीं, देशभर में लिम्फेडीमा के 5.5 लाख एवं 1.5 लाख हाइड्रोसील के मामले प्रतिवेदित हैं. उन्होंने कहा कि बिहार के सभी 38 जिले इस रोग से ग्रसित है. डॉ. पांडेय ने कहा कि एमडीए में पहली बार बूथ निर्माण कर लोगों को दवा खिलाना सुनिश्चित किया जाना है. उन्होंने कहा कि बूथ का निर्माण आँगनबाड़ी, स्कूल, पंचायत, पीएचसी, सीएचसी सहित मेडिकल कॉलेज पर आयोजित होगा. उन्होंने एमडीए की सफलता में बेहतर माइक्रोप्लान निर्माण, डीए ( ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर) के प्रशिक्षण, हाउस एवं फिंगर मार्किंग पर विस्तार से जानकारी दी.

अब डेली रिपोर्टिंग होगा मोबाइल एप्प के जरिए

केयर के स्टेट वेक्टर बोर्न लीड बिकास कुमार सिन्हा ने बताया अब एमडीए के दौरान होने वाली डेली रिपोर्टिंग मोबाइल एप्प के जरिए होगी. इसके लिए मोबाइल एप्प तैयार कर लिया गया है. ब्लाक कम्युनिटी मोबिलाइजर एमडीए के दौरान प्रतिदिन इसी मोबाइल एप्प से डेली रिपोर्टिंग करेंगे. साथ ही जिला स्तर से राज्य स्तर तक इसकी मॉनिटरिंग भी की जाएगी.


इस दौरान लेप्रा के रजनीकांत सिंह, विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉ. दिलीप, डॉ. माधुरी एवं डॉ. अरुण, पीसीआई के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. पंखुड़ी मिश्रा एवं सीफ़ार के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक रणविजय ने पीपीटी के जरिए रणनीति पर चर्चा की. इस दौरान क्षेत्रीय कार्यालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरीय क्षेत्रीय निदेशक डॉ. कैलाश, स्टेट आशा सेल के टीम लीड प्रणय, फाइलेरिया के राज्य सलाहकार डॉ. अनुज सिंह रावत , केयर से बासब रुज एवं प्रीति सहित 14 एमडीए जिलों के भीबीडीसीओ, भीबीडी कंसलटेंट सहित डीसीएम उपस्थित थे.

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