जमुई : जंगल के घनेपन और हरियाली का जिम्मा वनवासियों ने उठाया है। वनवासियों ने सीडबॉल के माध्यम से जंगल बढ़ाने की मुहिम चलाई है। भीमबांध के जंगलों में अब तक तीस हजार से अधिक सीडबॉल झाड़ियों में फेंका जा चुका है। हालांकि, लक्ष्य एक लाख का है। बरसात के मौसम में ये सीडबॉल जब अंकुरित होकर पौधे का रूप लेंगे, तब पर्यावरण संरक्षण के प्रयास में यकीनन चार चांद लग जाएंगे। इस मुहिम में समग्र सेवा संस्थान महती भूमिका निभा रही है। इस मुहिम में बच्चों से लेकर महिलाएं और युवा तक जोश व जुनून के साथ अपनी सहभागिता निभा रहे हैं। इनके जज्बे को देख अन्य लोग भी आगे आने लगे हैं।
हाथ से मिले हाथ बढ़ा सहयोग का दायरा
भीमबांध जंगल में जमुई जिले में अवस्थित गांव सोनरवा, अदबरिया, धमनकुंडा समेत मुंगेर जिला अंतर्गत भीमबांध व सोनारिया गांव के ग्रामीणों ने पहल शुरू की है। ग्रामीण चरितर ठाकुर, राजेश कुमार, बालमुकुंद ठाकुर, इंदर कोड़ा, सुमित कोड़ा, सरिता कुमारी, प्रागन मरांडी, सामेल हेम्ब्रम, राजेश मुर्मू, उषा मुर्मू, करीना मुर्मू, पूजा कुमारी, प्रियंका देवी, रीता देवी, रुदवा देवी ने बताया कि इस मुहिम को लोगों का सहयोग मिलने लगा है।
लोग स्वत: मदद करने को आगे आ रहे हैं। कई ने बताया कि बचपन में इस जंगल को बहुत घना देखते थे, लेकिन समय के साथ धीरे-धीरे जंगल का घनापन कम होता गया। इसका मौसम पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। लिहाजा, अब कई लोग सीडबॉल के माध्यम से जंगल की दशा सुधारने की मुहिम में जुड़ गए हैं।
मिट्टी में बीज को बांध बनाया जाता सीडबाल
गीली मिट्टी में बीज बंद कर सीडबॉल बनाया जाता है। समग्र सेवा के सचिव मकेश्वर कुमार ने बताया कि पौधारोपण में सबसे अधिक चुनौती उसके संरक्षण को लेकर होती है। हम लोगों ने विचार किया कि सीडबॉल को जंगल-पहाड़ में फेंका जाए तब पौधरोपण के लिए गड्ढे की आवश्यकता नहीं होगी। वर्षा होने पर मिट्टी के अंदर मौजूद बीज खुद ही फूटकर अंकुरित होने लगेगा और पौधे का रूप ले लेगा। बताया कि महुआ, बेल, अमरूद, आम, शरीफा, इमली, कटहल, बरगद सहित अन्य पौधा के बीज को गिली मिट्टी में बंद कर बीज सीड बनाया गया है।

