‘हमारा क्या दोष, हम तो पढ़ने आते हैं’; पटना कॉलेज के हॉस्टल खाली कराने पर प्रशासन से निर्दोष छात्रों के सवाल

पटना कॉलेज में फायरिंग और बमबाजी की लगातार घटनाएं होने के बाद सोमवार को पटना विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस के सहयोग से मिंटो, जैक्सन और इकबाल छात्रावासों को खाली कराया है। इस दौरान जिला प्रशासन की ओर से दंडाधिकारी भी मौजूद रहे।कॉलेज में अवस्थित पुलिस आउटपोस्ट में बल की संख्या बढ़ा दी गई है। दिन और रात की गश्ती तेज करने का निर्देश दिया गया है। थानेदार सबीह उलहक ने बताया कि 12 जुलाई की घटना में नामजद आरोपितों की खोज की गई, लेकिन वे नहीं मिल सके। हॉस्टलों को खाली कराने के बाद अवांछित तत्वों की गतिविधियों पर नजर रखने का निर्देश दिया गया है।

12 जुलाई को इकबाल और जैक्सन हास्टलों में क्या हुआ?

बीती 12 जुलाई को इकबाल और जैक्सन हास्टलों के छात्रों के बीच हिंसक झड़प हो गई थी। दोनों ओर से लगभग आठ बम फोड़े गए थे। वहीं, दो दर्जन से अधिक राउंड फायरिंग हुई थी। इसमें दो छात्र घायल भी हो गए थे। इस घटना का एक वीडियो भी इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ था, जिसमें फायरिंग होने पर पुलिसकर्मी भागते नजर आए थे। हालांकि, मुजफ्फरपुर न्यूज़ इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

दस विद्यार्थियों के खिलाफ दर्ज हुई प्राथमिकी

घटना के बाद घायल सुदर्शन कुमार के बयान पर इकबाल और नदवी छात्रावासों के दस विद्यार्थियों पर प्राथमिकी कराई गई थी। इसके बाद, पटना विश्वविद्यालय प्रशासन ने 24 घंटे में छात्रों से सभी हॉस्टलों को खाली करने के लिए कहा था, मगर ऐसा नहीं हुआ। तब पुलिस-प्रशासन से सहयोग लिया गया। गौरतलब है कि मिंटो, जैक्सन और इकबाल पटना कॉलेज के हॉस्टल हैं, जिसमें यूजी कोर्स के विद्यार्थी रहते हैं। वहीं, नदवी हॉस्टल में पीजी के विद्यार्थी रहते हैं।

छात्रों का पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन से सवाल

नदवी हॉस्टल के छात्रों का आरोप है कि इस घटना की पृष्ठभूमि कई दिनों से तैयार की जा रही थी। इस संबंध में प्रॉक्टर को जानकारी भी दी गई थी, लेकिन उन्होंने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। छात्रों ने पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन से सवाल किया कि मिंटो और जैक्सन हॉस्टल कुलपति के आवास के सामने स्थित हैं। वहीं पुलिस का आउटपोस्ट भी है, फिर ऐसी घटनाएं कैसे हो रही हैं?

इस तरह की घटनाओं में हॉस्टलों में रहने वाले कुछ ही विद्यार्थी शामिल होते हैं, मगर इसका खामियाजा विश्वविद्यालय प्रशासन सभी छात्रों को दे रहा है। छात्रों से साल भर का शुल्क लिया जाता है। यहां कई गरीब छात्र भी रहते हैं। ऐसे में वे कहां जाएंगे?

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Discover more from Muzaffarpur News

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading