बिहार : फिल्म और टीवी कलाकार, साहित्यकार सुश्री विभा रानी को डॉ. फादर कामिल बुल्के पुरस्कार प्रदान किया जाएगा. हिन्दी साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए बिहार सरकार ने इस प्रतिष्ठित पुरस्कार हेतु सुश्री विभा रानी के चयन की घोषणा की है.
कैंसर को मात देकर जिंदगी को पूरी उम्मीदों और हौसले के साथ जीने वाली शख्सियत सुश्री विभा रानी मूलतः बिहार के मधुबनी जिले की रहने वाली हैं और उनका वर्तमान व स्थायी ठिकाना मुंबई है. बहुआयामी प्रतिभा की धनी सुश्री विभा रानी राष्ट्रीय स्तर की हिन्दी एवं मैथिली की लेखिका, अनुवादक, थियेटर आर्टिस्ट और फिल्म कलाकार हैं. धधक, लाल कप्तान सहित अनेक फिल्मों में काम कर चुकीं विभा की इन दिनों टिकुली बहुत ही पापुलर वेबसीरिज है.
मैथिली लोक तत्व को समर्पितसुश्री विभा रानी की बंद कमरे का कोरस, चल खुसरो अपने घर( दोनों हिन्दी कहानी संग्रह), खोह स निक सइत (मैथिली कहानी संग्रह) मैथिली नाटक भाग रौ सहित तीन दर्जन से ज्यादा पुस्तकें प्रकाशित और चर्चित रही हैं. उन्होंने कई साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता लेखकों (हरिमोहन झा, प्रभास कुमार चौधरी आदि) की पुस्तकों का मैथिली से हिन्दी में अनुवाद किया है. सुश्री विभा ने मैथिली गारी गीत(डहकन), लोकगीत भी लिखे हैं. स्टोरी टेलिंग में उन्हें महारत है. खिस्सा कहे खिसनी ( लोककथाओं की किस्सा गोई) के माध्यम से मिथिला के लोक गीतों और लोक कथाओं की मंचीय प्रस्तुति कर चुकी हैं.
तीस से ज्यादा पुरस्कार मिल चुकेसुश्री विभा रानी अब तक नाटक, कथा, कविताओं के मराठी, गुजराती, उर्दू, तेलुगु, पंजाबी, बांग्ला, ओड़िया, अंग्रेजी आदि में अनुवाद कर चुकी हैं तथा तीस से अधिक राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुरस्कार व सम्मान प्राप्त हुए हैं.

