बिहार में बेसहारा वृद्धजनों को सहारा देने के लिए जल्द ही सभी जिला मुख्यालय में आश्रय स्थलों की शुरुआत होने जा रही है। मुख्यमंत्री वृद्धजन आश्रय स्थल योजना के तहत अभी 50-50 बेड की 2 यूनिट को यानी कुल 38 जिलों में 76 आश्रय स्थलों को शुरू किया जा रहा है। इसके संचालन की जिम्मेदारी संबंधित नगर निकायों के नगर आयुक्त या कार्यपालक पदाधिकारी को सौंपी गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर यह प्लान बना है।
नगर विकास एवं आवास विभाग ने इसे अमलीजामा पहनाने के लिए फिलहाल 19 करोड़ 67 लाख रुपये जारी कर दिया है। सभी संबंधित नगर निकायों को इस आश्रय स्थल के संचालन के लिए स्थान का चयन कर इसकी जल्द शुरुआत कर देनी है। इन आश्रय स्थल के संचालन के लिए वार्षिक बजट 1 करोड़ 6 लाख रुपये रखा गया है। हालांकि, पटना में समाज कल्याण विभाग के स्तर से वृद्धजनों के लिए ऐसे एक ओल्ड एज होम का संचालन किया जा रहा है। इसके मद्देनजर फिलहाल यहां अलग से आश्रय स्थल खोलने की योजना नहीं है।
बल्कि इसी होम को अपग्रेड कर सुविधा संपन्न बनाया जाएगा। यहां मिली राशि से इसे 100 बेड का सभी सुविधाओं से संपन्न वृद्धजन आश्रय स्थल के तौर पर विकसित किया जाएगा। इस वृद्धजन आश्रय स्थल का संचालन पटना नगर निगम के स्तर से कराया जाएगा। यहां की जरूरतों को देखते हुए पटना नगर निगम को मरम्मत कार्य समेत अन्य सभी मूलभूत सुविधाओं को बहाल करने में आने वाले खर्च का आकलन कर इससे संबंधित अलग से प्रस्ताव तैयार कर भेजने को कहा है ताकि इसके आधार पर उचित कार्रवाई कराई जाए।
आगे अनुमंडल स्तर पर आश्रय स्थल खुलेंगे
अभी ऐसे आश्रय स्थलों को जिला स्तर पर खोला जा रहा है। इसके बाद दूसरे चरण के अंतर्गत प्रत्येक अनुमंडल स्तर पर एक यूनिट को संचालित करने की योजना है। जिला और अनुमंडल स्तर पर 139 यूनिट खोली जाएंगी। 50 बेड प्रति यूनिट के हिसाब से 6950 वृद्धजनों के लिए ऐसे आश्रय स्थलों का संचालित करने की योजना है।
प्रत्येक जिला मुख्यालयों 2 यूनिट
प्रत्येक जिला मुख्यालयों 2 यूनिट से इस आश्रय स्थल की शुरुआत होने जा रही है। इनमें 3 हजार 80 बेसहारा और लाचार वृद्धजनों के रहने, खाने समेत अन्य सभी सुविधाओं की व्यवस्था रहेगी। मुख्यमंत्री वृद्धजन आश्रय स्थल योजना की स्वीकृति दो वर्ष पहले ही कैबिनेट से मिली थी। इस योजना का संचालन शुरुआत में समाज कल्याण विभाग के स्तर पर करने की योजना थी, लेकिन कुछ स्तर पर समस्या आने के कारण अब इसका संचालन नगर विकास एवं आवास विभाग से कराया जा रहा है। साथ ही इसके संचालन की जिम्मेदारी सरकारी अधिकारियों को सौंपा गई है। सूबे में जिस तरह से बच्चों और महिलाओं के लिए आश्रय या सुधार गृह का संचालन किया जाता है।
