बिहार: लॉकडाउन में लौटे प्रवासियों की मेहनत से रेडिमेड कपड़ों के उत्पादन का हब बनकर बिहार ही नहीं पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचने वाला पश्चिम चंपारण जिले को चनपटिया अब लोगों के जीवन में मिठास भी घोल रहा है। चनपटिया का वार्ड-10 मोरब्बा उत्पादन का केंद्र बन रहा है। वार्ड में एक दर्जन से अधिक जगहों पर मोरब्बा बनाया जा रहा है। छोटे स्तर पर शुरू हुआ काम कुटीर उद्योग का शक्ल ले चुका है। बेहतरीन स्वाद और शुद्धता के कारण यहां बनने वाले मोरब्बे की मांग उत्तरप्रदेश से नेपाल तक हो गई है।
चनपटिया में वर्षों से छोटे तौर पर चला आ रहा यह काम अब बड़ा आकार ले चुका है। मोरब्बा यहां के कई परिवारों को आर्थिक रूप से संवार रहा है। दर्जनों खुदरा दुकानदार भी मोरब्बा बेचकर अच्छी कमाई कर रहे हैं। मोरब्बा उत्पादक महेंद्र कुमार साह बताते हैं कि यहां बने खास मोरब्बे की मांग तेजी से बढ़ रही है। फिलहाल उनके यहां प्रतिदिन 3-4 क्विंटल मोरब्बा का उत्पादन होता है। सर्दियों में उत्पादन दोगुना हो जाता है। उत्पादक ओमप्रकाश साहू बताते हैं, आजकल अन्य मिठाइयों की शुद्धता पर लोगों का भरोसा कम होता जा रहा है। ऐसे में बिना किसी मिलावट के बने मोरब्बे के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है।
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हब बनाने की घोषण हुई पर आगे नहीं बढ़ी बातमोरब्बा उद्योग से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि सरकारी स्तर से सहयोग मिले तो उनके कारोबार का दायरा बढ़ सकता है। यहां मोरब्बा उत्पादन लगभग तीन दशकों से चल रहा है। इसके बावजूद सरकारी स्तर पर इस उद्योग को कोई बड़ी मदद नहीं मिली है। समय-समय पर जिला स्तर से चनपटिया में मोरब्बा उद्योग का क्लस्टर बनाने की घोषणा की जाती है, लेकिन इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। मोरब्बा के कारोबारियों का कहना है कि उन्हें वित्तीय सहायता मिले तो न केवल कारोबार का दायरा फैलेगा, नए उद्यमी भी इससे जुड़ेंगे।

