तेजस्वी ही निर्णायक; प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को आखिर जाना पड़ा डिप्टी सीएम की दर पर

बिहार : बिहार के मंत्रिमंडल विस्तार में कांग्रेस के दो मंत्रियों के शामिल होने के सवाल पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कई महीने पहले कह दिया था कि जनता दल यूनाईटेड (JDU) या उन्हें (सीएम को स्वयं) इससे मतलब नहीं, यह राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस (INC) को मिलकर तय करना है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने यह पद संभालने के बाद से बिहार के अपने 19 विधायकों के आधार पर दो की जगह चार मंत्रीपद की मांग कर रहे हैं। अब जब मंत्रिमंडल विस्तार के साथ फेरबदल की बात आगे बढ़ चुकी तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आखिरकार डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव का रुख किया। रविवार को वह बिहार विधानसभा में विधायक दल के नेता शकील अहमद खान के साथ तेजस्वी से मिलने पहुंचे।

एक महीने से कांग्रेस बेसब्र हो रही है

बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार का इंतजार कई महीनों से हो रहा है। कांग्रेस को एक और मंत्रीपद दिया जाना पक्का है, लेकिन जब अखिलेश सिंह प्रदेश अध्यक्ष बने तो उन्होंने अनुपात का गणित सामने लाते हुए दो अन्य पदों की मांग रख दी। ईद के समय इसपर खूब राजनीति हुई। अखिलेश सिंह ने यह तक कह दिया कि सीएम ने दो पदों के लिए आश्वासन दिया है, लेकिन तेजस्वी ने तब इससे इनकार कर दिया। इसके बाद सीएम से जब पत्रकारों ने सवाल किया तो उन्होंने इसे कांग्रेस-राजद के बीच का मसला बता दिया। तभी से यह उठापटक चल रही थी। पिछले महीने विपक्षी एकता के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रयास से 23 जून को पटना में हुई बैठक के पहले जब हिन्दुस्तानी आवामी मोर्चा के इकलौते मंत्री संतोष कुमार सुमन उर्फ संतोष मांझी ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया तो मुख्यमंत्री के निर्देश पर जदयू से रत्नेश सदा को मंत्री के रूप में शपथ दिला दी गई। इस समय भी कांग्रेस ने मांग उठाई, लेकिन कहा गया कि 23 जून की बैठक के बाद विस्तार होगा। 23 जून से 23 जुलाई तक कई तरह की चर्चाओं के बाद अब तेजस्वी यादव से कांग्रेस नेताओं ने मुलाकात की है।

विस्तार के साथ फेरबदल भी पक्का माना जा रहा

बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार ही होना था, लेकिन अब फेरबदल की भी गुंजाइश सामने आ चुकी है। रविवार को सिर्फ तेजस्वी आवास में ही हलचल नहीं थी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अचानक संसदीय कार्य और वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी के घर पहुंचना भी चौंकाने वाली घटना है। कहा जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार के साथ फेरबदल में चौधरी की अहम भूमिका होगी। संतोष सुमन ने भी नीतीश की जगह मंत्रिमंडल छोड़ने के पहले चौधरी से मुलाकात की थी और पिछले दिनों अपने विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक को लेकर राजद कोटे से प्रदेश के शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर ने भी अपना दुखड़ा इन्हें जाकर सुनाया था। चौधरी मुख्यमंत्री के आसपास रहते हैं और जो लोग सीएम से सीधे नहीं बोल पाते, वह इनके जरिए बात पहुंचाना चाहते हैं। माना जा रहा है कि दो मंत्रियों ने मातहत अधिकारियों की मनमानी से तंग आकर विभाग बदलने की मांग रखी है, जिसपर मुख्यमंत्री को फैसला लेना है। इधर तेजस्वी से कांग्रेस नेताओं की मुलाकात के बाद कोटा संशोधित होता है या नहीं, यह फैसला होगा। इन दोनों फैसलों पर नीतीश-लालू की मुहर के बाद मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की घोषणा होगी।

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