कठपुतली बोल रे! महिलाओं के हक की आवाज बना अभियान, 50 से ज्यादा गांवों की जुड़ी आधी आबादी

मुजफ्फरपुर की महिलाओं की कठपुतली बोलती है। केवल बोलती ही नहीं बल्कि अपने हक-हुकूक को लेकर आवाज भी बुलंद करती है। जिन बातों को कहने में महिलाएं भी हिचकती हैं, उन बातों को उनकी यह कठपुतली धड़ल्ले से लोगों के सामने रखते हैं। जिले की एक दर्जन से अधिक महिलाएं इस लोककला के माध्यम से आधी आबादी के हुकूक की आवाज बुलंद कर रही हैं। इन महिलाओं की कठपुतली उनके अधिकारों को पाने का हथियार बन गई है। यही कारण है कि केवल मुजफ्फरपुर या बिहार ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, यूपी समेत अन्य राज्यों में भी इन कठपुतली की पहुंच है। शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ हिंसा के विरुद्ध भी कठपुतलियां बोल रही हैं।

अभियान से 50 से ज्यादा गांवों की महिलाएं जुड़ी
जिले में कठपुतली के माध्यम से महिलाओं के हक की आवाज उठाने का अभियान खुद इन महिलाओं ने ही शुरू किया। इस लोककला से जुड़ी हुई महिलाएं सुमन कुमारी, अनिता कुमारी बताती हैं कि महिलाएं जो बात खुद कहने से झिझकती थी, उसका माध्यम यह कठपुतली बन गई। कठपुतली के माध्यम से नाटक और गीतों में अपनी बात रखना इन महिलाओं ने सीखा।

कठपुतली बनीं महिलाओं की आवाज
बात चाहे परिवार में महिलाओं के निर्णय लेने की हो, उनके अधिकारों के हनन की हो, बेटियों को शिक्षा के अधिकार से वंचित करने की हो, यह सब उनके मन की बात अब कठपुतली बोलती है। यही वजह है कि 50 से अधिक गांव में हजारों महिलाएं कठपुतली बोल रे अभियान से जुड़ गई हैं और गांव-गांव में इसका शो कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में चलाया शांति अभियान
अभी हाल में इन महिलाओं की कठपुतली ने छत्तीसगढ़ में शांति अभियान भी चलाया। कठपुतलियां 20 से अधिक गांवों में पहुंची और कमाल यह कि कई को वहीं रोक लिया गया। लोक कलाकार सुनील कहते हैं कि कठपुतली बोलती है तो समाज से लेकर प्रशासन तक के लोग सुनते हैं। सालों पहले की यह कला आज महिलाओं का प्रतिनिधित्व कर रही।

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