इस राखी को फेंकने से उग जाएंगे कई प्रकार के पौधे, देश के लाखों जवान लाएंगे हरियाली

पूर्णिया : देश के सैनिक भाइयों के लिए पूर्णिया से 5 लाख राखियां भेजी जाएगी. इससे सैनिक भाइयों के साथ पर्यावरण भी मुस्कुराएगा. क्योंकि इस राखी में कई फल और पौधों का बीज डाला गया है. जिसको फैंकते ही वह बीज पौधे में बदल जाएगा.पूर्णिया के मारवाड़ी महिला सम्मेलन शाखा समिति के तत्वावधान में वीडियो ट्रेनिंग देकर महिलाओं एवं थेलेसिमिया पीड़ित बच्चे सहित भारत के अलग अलग राज्यों सहित पूर्णिया के 15 महिलाओं एवं बच्चों को घर पर उपलब्ध चीजों जैसे गोबर, गत्ता, जुट, कलिनजी का बीज, गेहूँ के बीज, मक्का के बीज, मुली की बीज, पपीता का बीज , तुलसी के बीज सहित अन्य कई ऐसे समान से घर बैठे आसानी से राखी बनाने के तौर तरीके सिखाया है.अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला की यह है तैयारी

महिलाओं द्वारा देश के सैनिक भाइयों को 5 लाख राखियां भेजी जाएगी. जिसको लेकर मारवाड़ी महिला सम्मेलन के अध्यक्ष ने बिहार सहित भारत के अन्य राज्यों एवं जिलों के महिलाओं को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ट्रेंड भी किया गया. उन्होंने इसके लिए वेबीनार आयोजन किया गया जिसमें मुख्य प्रशिक्षण कर्ता हस्तशिल्प के एक्सपर्ट किशोर कुमार उर्फ गुल्लू दा और डॉक्टर निशा प्रकाश के द्वारा महिलाओं एवं बच्चों को प्रशिक्षण दिया गया . जिसमें पूर्णिया से लगभग 15-20 महिलाएं और कुछ थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को भी राखी बनाने की कला सिखाई गई.उन्होंने कहा कि पूरे भारत के महिलाओं ने इससे जुड़कर सीखा और सराहा.

इस राखी की होगी ये सब खासियत

डॉक्टर निशा प्रकाश ने जानकारी देते हुए कहा कि इन सब चीजों के पीछे की वजह यह है कि बीते कुछ वर्ष पूर्व कोरोना काल में जब ऑक्सीजन की काफी किल्लत हो गई. तो लोग पेड़ पौधे ढूंढने लगे थे. इसी क्रम में उन्हें ख्याल आया कि राखी ऐसी बनाई जाए जिसे लोग उपयोग करने के बाद अगर फेक भी दें तो उनसे हम सबों को पर्यावरण को विशेष फायदा हो सकें. इसलिए उन्होंने अलग-अलग बीजों से राखी तैयार किया है.

 

अगस्त के महीने में जायेगी राखियाँ

उन्होंने कहा इन सभी महिलाओं के द्वारा बनाए गए राखी को 1 अगस्त से 10 अगस्त तक देश के सैनिक भाइयों अलग अलग पते पर भेज दी जाएगी.

ट्रेनर एक्सपर्ट ने कही ये बात

प्रशिक्षण देते पूर्णिया के हस्तशिल्प कलाकार गुल्लु दा ने कहा महिलाओं को स्वदेशी राखी बनाने के प्रशिक्षण दिया गया. साथ ही गोबर जूट एवं अन्य कई चीजों से आसानी से राखियों को कैसे बनाया जा सके. इसके लिए विशेष जानकारियां दी. वही मौके पर मौजूद सभी महिलाओं ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रशिक्षक की बातों को सुनकर राखियों को बनाना सीखा और अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन शाखा के इन विशेष पहल की सराहना की.

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