पटना. ‘ये मेरा दुर्भाग्य है कि जिस-जिस को आगे बढ़ाया, उसी ने मुझे धोखा दिया. अब देखिए न एक नेता है जो मेरे पीछे पड़कर जनता दल से अलग करवा दिया, आज देखिए कहां है आजकल. भाग गया कहीं, फिर आया फिर उसको बनाए फिर भाग गया..फिर आना चाहता है लेकिन हम बोले अब नहीं’. दरअसल नीतीश कुमार ये कसक और दावा RLJD के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा के लिए कर रहे थे जो उनके साथ अब नहीं हैं.
नीतीश कुमार की कसक कुशवाहा के साथ साथ जीतन राम मांझी, आरसीपी सिंह के लिए भी थी जिनके बारे में नीतीश कुमार ने कहा कि उन्होंने इन नेताओं को काफी आगे बढ़ाया लेकिन ये लोग उन्हें छोड़कर चले गए. नीतीश कुमार का ये दावा कि उपेन्द्र कुशवाहा फिर से उनके साथ आना चाहते थे जिसे उन्होंने ठुकरा दिया ने बिहार की सियासत को गर्मा दिया है. बिहार में इस सवाल का जवाब खोजा जा रहा है कि इस वक्त नीतीश कुमार के इस दावे का मतलब क्या हो सकता है. क्या वाकई उपेन्द्र कुशवाहा नीतीश कुमार के साथ वापस जाना चाहते थे?
उपेन्द्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार के इस दावे पर पलटवार करते हुए नीतीश कुमार की मनोदशा पर सवाल खड़ा कर दिया. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं. उपेन्द्र कुशवाहा कहते हैं आदरणीय भाई साहब, वाकई सठिया गए हैं, आप. दूसरे को कहते हैं कि अंडबंड बोलता है, अपने क्या बोलते हैं ? सबसे ज्यादा अंडबंड तो खुद ही बोलते हैं. कौन नहीं जानता है कि आप अभी भी उधर से इधर के जुगाड़ में हैं क्योंकि आप भी तो अब बुझिए गये हैं न कि लालू जी आपको भी टहला ही रहें हैं. आपको लगता था कि आप उनको टहला दीजिएगा.