बिहार और दूसरे राज्यों में तेजी से फैले आई फ्लू पर अध्ययन किया जाएगा। अंधापन निवारण के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ हरिश्चंद्र ओझा ने बताया कि नेशनल हेल्थ मिशन (एनएमएच) ने राज्य के सभी जिलों से डाटा मांगा है। जिलों से उपलब्ध कराए गए डाटा को दिल्ली भेजा जाएगा। इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय इस पर अध्ययन करेगा। उन्होंने बताया कि पांच वर्ष से 50 वर्ष तक के मरीजों की रिपोर्ट बनाकर भेजने को कहा गया है। वहीं, सिविल सर्जन डॉ यूसी शर्मा ने बताया कि जिले से रिपोर्ट भेजी जा रही है।
एनएचएम के साथ हुई थी सभी राज्यों की बैठक आई फ्लू के बढ़ते मामलों पर नेशनल हेल्थ मिशन के साथ सभी राज्यों की बैठक हुई थी। बैठक में तेजी से फैल रहे आई फ्लू पर चर्चा की गई थी। बैठक में यह बात सामने आई कि 31 जुलाई तक पूरे देश में 80 हजार आई फ्लू के मामले सामने आ चुके हैं। बैठक में कहा गया कि पश्चिम बंगाल और दिल्ली में एक ही पैटर्न पर आई फ्लू फैल रहा है। बिहार में 26 और 27 जुलाई को सबसे ज्यादा आई फ्लू के मामले दर्ज किए गए थे।
मेडिकल कॉलेज से पीएचसी में आये मरीजों का बनेगा डाटा
राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ.हरिशचंद्र ओझा ने बताया कि मेडिकल कॉलेज से लेकर पीएचसी तक आए आई फ्लू के मरीजों का डटा तैयार किया जाएगा। इसके लिए सभी को एक फार्मेट दिया गया है। इसी फार्मेट में सभी जिलों को रिपोर्ट देनी है। डॉ.ओझा ने बताया कि सभी जिलों से रिपोर्ट आने के बाद इसे कंपाइल किया जाएगा। उसके बाद इसे दिल्ली भेज दिया जाएगा। इस फार्मेट में महिला और पुरुष के बारे में अलग-अलग जानकारी देनी है।

राज्य स्वाथ्य समिति ने एम्स और आईजीआईएमएस से भी आई फ्लू की रिपोर्ट मांगी है। इन अस्पतालों में भी जो मरीज इलाज के लिए आये होंगे,उनका डाटा तैयार होगा। विभाग के अनुसार आई फ्लू कितने दिनों में ठीक हुआ, क्या लक्षण थे, इस बारे में केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय अध्ययन करेगा।