वैशाली: बिहार की आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं के लिए जीविका वरदान साबित हो रहा है. जीविका के माध्यम से महिलाओं को लगातार रोजगार से जोड़ा जा रहा है. इससे उनकी आर्थिक स्थिति ठीक होते जा रही है.वैशाली जिले के गोरौल में पहला जीविका सिलाई प्रशिक्षण सह उत्पादन केंद्र खोला गया है. यहां पर 300 जीविका दीदियों को रोजगार मिला है.इन महिलाओं को घर पर ही रोजगार मिलने से इनके परिवार की स्थिति संभल रही है.
जीविका द्वारा पहले महिलाओं को सिलाई-कटाई का प्रशिक्षण दिया जाता है, फिर वहीं पर काम पर रख लिया जाता है. कमोवेश हरमहिला महीना में 7 से 8 हजार कमा लेती हैं. इस सेंटर पर गोरौल सहित इलाके के 10 किलोमीटर तक की महिलाएं काम करने आती है.यहां काम करने वाली जीविका दीदियों की परेशानी बिजली की कमी है.सिलाई सेंटर पर बिजली कम रहने के कारण जीविका दीदी का काफी समय बर्बाद हो जाता है. उनका कहना है कि अगर बिजली सही से रहे तो हम लोग प्रतिदिन 20 हजार झोला बना सकते हैं. महिलाएं सुबह 9 बजे सेंटर पहुंचती हैं और शाम के 6 बजे बजे अपने घर की ओर लौट जाती हैं.
दिनभर महिलाएं 1500 झोले तैयार करती है
यहां की महिलाओं का कहना है कि हम लोग आसपास की महिलाओं को भी कहते हैं कि आप सिलाई सेंटर चलो और वहां पर प्रशिक्षण लो. तब आप को रोजगार मिल जाएगा. सिलाई प्रशिक्षण केंद्र में काम करने वाली रीना देवी बताती हैं कि हम लोग प्रशिक्षण केंद्र में छह दिवसीय ट्रेनिंग करने के बाद से यहां पर काम कर रहे हैं. प्रतिदिन यहां पर हम लोग सिलाई करने आते हैं. हम लोग अभी एक झोला तैयार करते हैं, तो 6.80 रुपया मिलता है. दिन भर में सभी मिलकर 1500 झोला तैयार कर सकते हैं.
पहले ट्रेनिंग, फिर देते हैं काम
सिलाई प्रशिक्षण केंद्र के प्रोडक्शन मैनेजर दुर्गा झा बताते हैं कि हम लोग पहले जीवका दीदी को प्रशिक्षण देते हैं. उसके बाद उनसे पूछताछ करते हैं. अगर वह इच्छुक होती हैं, तो हम लोग उन्हें यहीं पर रोजगार भी दे देते हैं. श्री झा ने बताया कि यहां 456 आधुनिक मशीन है. 300 जीविका दीदी अभी यहां पर काम कर रही हैं. एक झोला बनाने में 4 से 5 मिनट लगता है. हम लोग पीस के अनुसार दीदियों को पैसा देते हैं. एक पीस झूला का 6.80 रुपया देते हैं.