जमुई. बिहार के जमुई जिले के सुदूर चिनवेरिया गांव के 81 साल के बुजुर्ग किसान अर्जुन मंडल को अब उनके काम का सम्मान मिलने वाला है. दरअसल बीते पांच दशक से भी अधिक समय से विलुप्त हो रहे औषधीय पौधे को बचाने की कोशिश में जुटे किसान अर्जुन मंडल को भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से सम्मानित किया जाएगा. जमुई जिले के लक्ष्मीपुर प्रखंड के चिनवेरिया गांव के किसान अर्जुन मंडल को यह पुरस्कार आगामी 12 सितंबर को दिल्ली में मिलेगा. किसान अर्जुन मंडल ने पांच दशक से भी अधिक समय से अपनी नर्सरी में दर्जनों विलुप्त हो चुके औषधीय पौधों को बचाकर रखा है. यही नहीं अर्जुन मंडल विलुप्त हो रहे औषधीय पौधों को घरों में लगाने के लिए लोगो को प्रेरित भी करते हैं। जिस कारण यह बुजुर्ग किसान सिर्फ बिहार ही नही पूरे देश मे जाने जाते हैं. विलुप्त हो रहे औषधीय पौधों को बचाने के लिए अर्जुन मंडल पहले भी कई बार सम्मानित हो चुके हैं.
अर्जुन मंडल को भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण के द्वारा Plant Genome Savior Farmers Reward and Recognition राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. नई दिल्ली में 12 से 15 सितंबर तक आयोजित प्रदर्शनी में यह किसान अपने औषधीय पौधों की जानकारी देते हुए एक स्टॉल पर मौजूद रहेंगे. बताते चले कि अर्जुन मंडल बीते तीन दशक से भी अधिक समय से अपना सारा समय विलुप्त हो रहे औषधीय पौधों को संरक्षित करने लगा देते हैं. अर्जुन मंडल अपने नर्सरी आरोग्य वाटिका में 160 से अधिक प्रकार के औषधीय पौधों को तैयार करते हैं। 81 साल के इस बुजुर्ग किसान ने अपनी नर्सरी में मालकांगनी, गरुड़तरु, लक्ष्मीतरु, नील, दमबेल, बाकस, गोरखमुंडी उल्टाकमल, चारुपुत्रक, कुचला, दर्दमेडा, अपरस, दहीपलास, ईश्वर फुल, गुलमार जैसे 22 प्रकार के दुर्लभ प्रजाति के औषधीय पौधों को संरक्षित कर रखा है. इनकी नर्सरी में बीज दुर्लभ प्रजाति के औषधिय पौधे तैयार होते हैं, जिसकी मांग लोग बिहार ही नहीं दूसरे प्रदेशों से भी करते हैं.
बता दें, अर्जुन मंडल इंटर पास हैं और 1969 में होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज भागलपुर से डिप्लोमा धारी हैं, जो 1970 से औषधीय पौधों को संरक्षित करते आ रहे हैं. इसी कारण 2013 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रेष्ठ किस पुरस्कार से सम्मानित किया था, जिसमें इन्हें 51000 रुपये की राशि प्रदान की गई थी. आगामी 12 सितंबर को नई दिल्ली में इस पुरस्कार में अर्जुन मंडल के अलावा बिहार के तीन और किसानों को अवार्ड मिलेगा.
अर्जुन मंडल अपने नर्सरी में सिर्फ औषधीय पौधों को तैयार ही नहीं करते बल्कि लोगों को इस बारे में जागरूक भी करते हैं. 81 साल के अर्जुन मंडल को भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से मिलने वाले पुरस्कार को लेकर लोग शुभकामनाएं दे रहे हैं. वहीं इस किसान का कहना है कि उनकी यही इच्छा है कि औषधीय पौधों को बचाया जाए जो विलुप्त हो रहे मेडिसिनल प्लांट है उसे संरक्षित किया जाए, जिसके लिए वह जो भी बन पड़ता है वह कर रहे हैं. रसायन के इस्तेमाल से लोग बीमार हो रहे हैं, रासायनिक खाद से औषधीय पौधों को नुकसान पहुंच रहा है.