मलेरिया पर बिहार का कड़ा प्रहार, 2030 तक इस बीमारी को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य

बिहार : प्रदेश के सभी 38 जिलों में मलेरिया के नए मामलों में कमी आने लगी है। स्वास्थ्य विभाग की हालिया रिपोर्ट बताती है कि मलेरिया के नए मामलों में बिहार श्रेणी दो से खिसक कर श्रेणी एक में आ गया है। स्वास्थ्य विभाग ने राज्य से मलेरिया के पूरी तरह से उन्मूलन के लिए 2030 तक का लक्ष्य निर्धारित किया है। मलेरिया को चार श्रेणी में बांटा गया है। श्रेणी तीन, दो, एक और शून्य। प्रति हजार की आबादी के हिसाब से श्रेणी का निर्धारण होता है। 2023 अप्रैल तक बिहार के अधिकांश जिले श्रेणी एक तक पहुंच चुके थे।डेंगू मच्छर से बचना है तो पहनें हल्के रंग के कपड़े - how to protect  yourself from dengue fever - Navbharat Timesविभाग के स्तर पर निरंतर कार्यवाही

विश्व मलेरिया दिवस के मौके पर बिहार को वर्ष 2015 से 2021 के बीच मलेरिया की निर्धारित श्रेणी दो से एक में पहुंचने के लिए सम्मानित भी किया गया था। वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम पदाधिकारी और अपर निदेशक डा. अशोक कुमार ने बताया कि वर्ष 2030 तक देश से मलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा बिहार में भी 2030 तक मलेरिया के संपूर्ण खात्मे के लिए कार्य हो रहे हैं। फिलहाल हमारा लक्ष्य श्रेणी एक से निकल कर शून्य पर पहुंचने का है। डा. कुमार ने बताया कि मलेरिया को जड़ से समाप्त करने के लिए विभाग के स्तर पर निरंतर कार्यवाही चल रही है।

निरंतर डीडीटी का छिड़काव

इसी कड़ी में मलेरिया से सर्वाधिक प्रभावित सात जिले मुंगेर,जमुई, गया, औरंगाबाद, नवादा, कैमूर और रोहतास में निरंतर डीडीटी का छिड़काव किया जा रहा है। यह कार्य निरंतर 31 अक्टूबर तक चलेगा।

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