पश्चिम चंपारण: सच्ची आस्था और ईश्वर में विश्वास मजहबी बेड़ियों को तोड़ देता है. ऐसे में न तो किसी रहनुमा की जरूरत होती है और न ही किसी आडंबर की, क्योंकि सच्ची आस्था इंसान का विश्वास मजहब से हटाकर सीधे ईश्वर में जोड़ देती है. कुछ ऐसा ही हुआ है नरकटियागंज के शिवगंज के औरंगजेब के साथ. उन्होंने अपने बच्चे को मौत के मुंह से बाहर निकालने के लिए महादेव से प्रार्थना की. मंशा पूरी होने पर मुस्लिम होते हुए भी वो कंधे पर कांवड़ उठा पूरे श्रद्धा भाव से महादेव के दर्शन के लिए बाबाधाम पहुंच गए. अब आलम ऐसा है कि वे हर वर्ष महादेव के दर्शन के लिए पूरे विधि विधान के साथ बाबाधाम की हाजरी लगाएंगे.
नरकटियागंज प्रखंड के शिवगंज के रहने वाले औरंगजेब अहमद एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं. बेटे के जन्म के बाद पता चला कि उसके हृदय में छेद है. इलाज के लिए अहमद ने देश के कई राज्यों में बड़े-बड़े अस्पतालों का चक्कर लगाया. समय बीतता गया और बेटे की उम्र भी बढ़ती गई, लेकिन अहमद को दुख इस बात का था कि उनके बेटे के हृदय में मौजूद छेद का आकार बढ़ता ही जा रहा था. जन्म से लेकर 12 वर्ष की उम्र तक इलाज कराने के बावजूद भी बच्चा ठीक नहीं हो सका. हद तो तब हो गई जब डॉक्टर्स ने 12 एमएम का छेद बताते हुए इलाज से मना कर दिया और घर ले जाने को कहा. उम्र कम होने की वजह से कोई भी डॉक्टर ओपन हार्ट सर्जरी नहीं करना चाहता था. ऐसे में औरंगजेब पूरी तरह से टूट गए.
महादेव से मांगी बेटे की जिंदगी
घर ले जाने के क्रम में किसी ने उन्हें अहमदाबाद स्थित सत्य साई हॉस्पिटल ले जाने की सलाह दी. औरंगजेब ने ऐसा ही किया. वहां पहुंचने पर भी बच्चे की हालत देख डॉक्टर्स चिंतित थे. ऑपरेशन से हिचकिचा रहे थे. मामले में मोड़ उस वक्त आया जब औरंगजेब अस्पताल के मुख्य द्वार पर पहुंचे और वहां स्थापित महादेव की प्रतिमा देखी. प्रतिमा देखने के बाद वह घुटने के बल बैठ गए और पूरी तरह से टूट कर महादेव के समक्ष रो पड़े. दुनियादारी और मजहबी ताना बाना भूलकर औरंगजेब ने भोलेनाथ से अपने बेटे की जिंदगी मांगी. भक्ति से शक्ति मिली और शक्ति मिलने पर औरंगजेब ने हिम्मत जुटा डॉक्टर से ऑपरेशन करने को कहा. डॉक्टर ने भी ओपन हार्ट सर्जरी की और मृत्युंजय महादेव के आशीर्वाद से बच्चे ने मृत्यु पर विजय पाई और सर्जरी सफल रही.
महादेव में औरंगजेब का विश्वास
बकौल औरंगजेब महादेव से की गई प्रार्थना पूरी होने पर वे खुशी- खुशी कंधे पर कांवड़ उठा, माथे पर तिलक लगा और गेरुवा वस्त्र धारण कर पूरे विधि विधान के साथ बाबाधाम पहुंच गए. आज औरंगजेब महादेव को अपना सबकुछ मानते हैं. महादेव में उनका विश्वास कुछ तरह से स्थापित हुआ है कि बिना पूजा किए वो अनाज का एक टुकड़ा भी मुंह में नहीं डालते हैं. खुशी की बात यह है कि उनका बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ और निरोग है. अब वे हर वर्ष बाबा धाम में हाजरी लगाएंगे.