दानापुर. देश के कोने-कोने में कई तरह की प्रथाएं आज भी सदियों से चली आ रही है, जिसे लोग आज भी मानते आ रहे है. इसी तरह की एक आस्था की दौड़ में लोग तलवार, लाठी और भला लिए इस आस्था से खप्पड़ के पीछे दौड़ लगातें है ताकि किसी भी धर्म या समाज के लोग महामारी से प्रभावित ना हो. करीब 200 वर्षों से ज्यादा समय से चली आ रही इस प्रथा में लोग धूमधाम से शामिल होकर भगवान की पूजा करते है. कई नेता-अभिनेता यहां माथा टेकने आते है.
तलवार और भाले लिए दौड़ लगाते यह झुंड मां काली और दुर्गा के खप्पड़ पूजा के मौके पर निकला है ताकि इस इलाके फुलवारी शरीफ में एकता और सद्भावना के साथ-साथ यहां रहने वाले लोगों को किसी प्रकार की महामारी से खतरा ना हो. इस यात्रा में हिन्दू, मुस्लिम, सिख और इसाईं समेत सभी वर्ग के लोग शामिल होते है. महामारी के खतरे से बचाने के लिए ही फुलवारी के सांगत पर मोहल्ले से हर वर्ष सावन के अमावस्या से पूजा शुरू होती है और 9 दिनों तक चलती है. इन 9 दिनों तक ये फलाहार पर रहते है.स्वप्न में माता ने खप्पड़ पूजा की दी थी सलाह
श्रद्धालुओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि सैकड़ों वर्ष पहले फुलवारी क्षेत्र मे महामारी फैली थी, जिसके कारण कई लोग इस बिमारी से मर रहे थे. उस समय लोगों के स्वप्न मे मा दुर्गा और मां काली ने खप्पड़ पूजा करने की सलाह दी और लोग खप्पड़ में आग डालकर मां दुर्गा और काली की परिक्रमा कर पूरे इलाके में घुमाया गया. तब से यहां कभी भी महामारी नहीं फैली. इसी परम्परा को अब तक लोग उसी श्रद्वा से निभा रहे है. वहीं इस पूजा में इतनी शक्ती है कि सभी धर्म के लोग एक साथ मिलकर इस समारोह में सिरकत करते है और एकता की मिसाल कायम करते है. सावनी पूजा में लगभग 50 हजार से जादा लोग सामिल होते है और एकजुट होकर पूजा को संपन्न करते है.
पुलिस का रहता खास पहरा
पटना पश्चिमी एसपी राजेश कुमार ने बताया कि पूजा के बाद खप्पड़ दौड़ में सभी भक्तों के हाथों में लाठी-तलवार, भाला, बरछी आदि होते है. इस लिहाजे से पुलिस अपनी तरफ से सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम भी रखती है ताकि कोई गड़बड़ी ना हो जाये. पुलिस इस पूजा के मद्देनजर हर पहलू से सुरक्षा का इंतजाम पहले से तो करती ही है साथ ही जब मां कि खप्पड़ यात्रा निकलती है तो उस समय जवान भी आगे-पीछे मौजूद रहते है और सुरक्षा में पटना की पूरी प्रशासनिक टीम लगी रहती है.
सिर्फ दो जगहों पर होती यह पूजा
यहां पुरुषों की संख्या से महिलाओं की संख्या भी कम नहीं होती. महिलाएं सात दिन पहले से ही मंदिर में गाना बजाना शुरु कर देती है और पूजा के दिन और जोश से हजारों महिलाएं भक्ति में लीन नजर आती है. यहां आने वाले हर भक्त की मनोकामनां जरूर पूरी होती है. बता दें यह खप्पड़ श्रावणी पूजा बिहार में केवल फुलवारी शरीफ और करौटा में ही जगह मनाई जाती है. मगर इस पूजा में शामिल होने लोग बिहार के अलावा देश के कोने-कोने से आते हैं.