नई शिक्षा नीति को लागू करने में घमासान, राज्यपाल ने कहा- बिहार के युवा जॉब मांगने वाले नहीं, देनेवाले बनें

पटना : आजकल शिक्षा को लेकर जो घमासान देख रहे हैं, वह कुछ और नहीं, बल्कि नई शिक्षा नीति के अनुपालन को लेकर है। इसमें इसके अतिरिक्त कुछ नहीं है। इसके ऊपर कोई टीका-टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं है। बिहारी हर क्षेत्र में आगे हैं। चाहे प्रतियोगी परीक्षा हो या कोई अन्य क्षेत्र, फिर बिहार क्यों पीछे रहेगा। ये बातें रविवार को होटल मौर्या में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तीन वर्ष पूरे होने पर आयोजित सिंपोजियम का शुभारंभ करते हुए राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहीं।

आज रोसड़ा स्थित सैनिक स्कूल में होगा राज्यपाल का आगमन, सभी तैयारी पूरी -  समस्तीपुर Townराज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने आगे क्या कहा?

उन्होंने कहा कि हमारी प्रतिज्ञा है कि बिहार के बच्चे शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाएं, दूसरी जगह के बच्चे यहां आकर शिक्षा ग्रहण करें। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वह जॉब सीकर (नौकरी या रोजगार मांगने वाले) नहीं, अपितु जाब देने वाले बनें।

नई शिक्षा नीति 2020 में केवल किताबी ज्ञान नहीं

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा नीति में सुधार पर अमल करना काफी कठिन होता है। नई शिक्षा नीति 2020 में केवल किताबी ज्ञान नहीं है। इसके अतिरिक्त भी बहुत कुछ है। यह जड़ से जुड़ी हुई है। शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने नई शिक्षा नीति के बारे में विस्तार से बताया है। छात्रों के लिए यह काफी महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में बिहार भाजपा के अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने भी नई शिक्षा नीति पर प्रकाश डाला। पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा ने कॉलेज के विस्तार की जानकारी के साथ नई शिक्षा नीति के लाभ के बारे में बताया। सीबीएसई के क्षेत्रीय निदेशक अरविंद कुमार मिश्रा ने कहा कि अब तक शिक्षा में अलग संस्कृति थी। इसमें काफी बदलाव आया है। मौके पर सांसद राजीव प्रताप रूडी, संस्थान के कुलसचिव कुमार शेखर व अन्य भी थे।

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