चौरचन पर्व में इस मंत्र के साथ करें चंद्रमा की पूजा! बरसेगी कृपा

दरभंगा : बिहार के मिथिलांचल के प्रसिद्ध पर्व में से एक चौरचन पर्व इस बार 18 सितंबर को मनाया जाएगा. स्थानीय लोग यह पर्व को छठ के तर्ज पर मनाते हैं. इसमें संध्याकालीन चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है. इस पर्व में दही का विशेष महत्व होता है. जानते हैं कि किस मंत्र के साथ इस पर्व को मानने से होगा विशेष लाभ. इस पर्व को मनाने की विधि को लेकर ज्योतिषाचार्य ने जानकारी दी है. इससे चंद्रमा खुश होकर आप पर कृपा बरसाएंगे.’

Chaurchan 2020 Wishes Images: Twitterati Celebrate Bihari Festival Chaurchan Parv and Ganesh Chaturthi With Greetings, Messages and Photos | 👍 LatestLYदरभंगा के ज्योतिषाचार्य डॉ. धीरज कुमार झा ने बताया कि कुछ दिनों के उपरांत मिथिला का काफी प्रसिद्ध पर्व चौरचन होने वाला है. यह पर्व 18 सितंबर को मनाया जाएगा. संध्या काल को इसमें ‘रोहिणीक्षत्र भाद्रशुक्ल चतुर्थी चंद्राय नमः इस मंत्र से पूजन किया जाता है. इस पूजन में घर की प्रधान महिला जैसे दादी, मां, चाची इसे संपन्न करती हैं.

चौठचन्द्र पूजा मंत्र, चौरचन पूजा मंत्र | Chaurchan Puja Mantra | Dadhi Shankh Tusharabham Mantraचौरचन पर्व में मारर भगाने का विशेष महत्व

संध्या के समय जब चंद्र का आगमन होता है तो उस समय आंगन में अर्पण (रंगोली) बनाई जाती है. बांस की डाली को मकई की बाली, नींबू, मूली, खीरा, केला और पकवान से सजाया जाता है. कई मटकुरी में दही भी रखा जाता है. इस पर्व में मारर भगाने का विशेष महत्व है. जिसे घर के पुरुष भगाते हैं. खीर के ऊपर पूरी रख कर की गई पूजा के बीच से दो भागों में बांट कर घर के पुरुष उसे ग्रहण करते हैं.

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