बिहार केसरी राधा ने पहलवानी में जीते 17 मेडल, पिता की मौ’त भी नहीं तोड़ पाई हौसला, लेकिन सरकार से नहीं मिला सहयोग

बिहार : पहलवानी में बिहार केसरी का खिताब बहुत बड़ा होता है. राधा कुमारी को बिहार केसरी का खिताब मिला है. 23 वर्षीय राधा आरा की रहने वाली है. भोजपुर के अब तक के इतिहास में राधा पहली महिला पहलवान है जिसे बिहार केसरी के उपाधि से नवाजा गया है. परिवार की आर्थिक तंगी और पिता के मौत के बाद भी राधा ने हार नहीं मानी और पहलवानों को धूल चटाती रही. वह आरा शहर के श्री टोला मोहल्ले के स्व. योगेंद्र शर्मा की पुत्री है.

बिहार केसरी राधा ने पहलवानी में जीते 17 मेडल, पिता की मौत भी नहीं तोड़ पाई हौसला, लेकिन सरकार से नहीं मिला सहयोग - Even fathers death could not break 23 year

17 स्टेट गोल्ड मेडल कर चुकी है अपने नाम

राधा कुमारी पहलवानी के क्षेत्र में बहुत नाम कमा चुकी है. अब तक बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए 17 बार राज्य को गोल्ड मेडल दिलाया है. राधा ने जिला स्तर के मुकाबले में अनगिनत मेडल जीते है. बक्सर में हुए कुश्ती प्रतियोगिता में पहली बार उन्होंने बिहार केसरी का खिताब अपने नाम किया.

बगैर संसाधन के बनी पहलवान
राधा ने पहलवानी की शुरुआत साल 2018 में आरा के जैन कॉलेज में शुरू की. उसके बाद जगह के अभाव में इधर से उधर भटकती रही. भोजपुर जिला प्रसाशन और राज्य सरकार की उदासीनता का शिकार राधा बनी. पहलवानी के अभ्यास के लिए जो सबसे जरूरी होता है वो है मैट. बिना मैट के आज भी अभ्यास करती है. राधा महाराज कॉलेज के घास पर अभ्यास करते हुए राधा के साथ आधा दर्जन अन्य लड़कियां भी पहलवानी में अंतराष्ट्रीय मेडल जीतने का सपना दिखाती है.

पिता की मौत भी नहीं तोड़ पाया हौसला
राधा ने अपनी समस्या और तंग हाली को बताते हुए बोली कि 2020 में बीमारी की वजह से पिता की मौत हो गई. जिसके बाद घर की आर्थिक स्थिति बेहद ही खराब हो चुकी थी. घर में कोई कमाने वाला नहीं था. उस समय सोचा कि खेल छोड़ शादी-विवाह कर लूं, लेकिन मेरे गुरु जुगेश्वर सर ने मेरा हौसला बढ़ाए रखा और वो मेरे खेल के खर्च को उठाने लगे. अभी भी मेरे सारे पैसे देते है. लेकिन 17 मेडल बिहार को देने के बाद भी आजतक राज्य सरकार से कोई मदद नहीं मिली.

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