यही है वो तस्वीर… मुलाकात का क्रम और अंदाज जितनी बार देखेंगे उतना ही उलझ जाएंगे!

बिहार : राजनीति के जानकार इन दोनों नेताओं की मुलाकात की इन तस्वीरों को लोकतंत्र की ऐसी सुंदर छवि बता रहे हैं, जिसमें वैचारिक रूप से दो ध्रुवों पर खड़े नेताओं के बीच भी आपसी सम्मान का भाव है. यह ऐसी तस्वीर है जहां धुर विरोधियों में मतभेद तो हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं. लेकिन क्या राजनीति करनेवाले भी ऐसा ही सोचते हैं?

पीएम मोदी और नीतीश कुमार की एक तस्वीर वो वायरल हो रही है जिसमें दूर से ही पीएम मोदी और नीतीश कुमार एक दूसरे का करबद्ध अभिवादन कर रहे हैं. इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन भी मौजूद हैं. राजनीति को अपना ओढ़ना-बिछौना मानने वालों की नजर में इन तस्वीरों के अपने खास अर्थ हैं. यह चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की उस बात की ओर इशारा करता है जहां सीएम नीतीश ने अपने लिए एक खिड़की (राजनीतिक रूप से पाला बदल के लिए) खोल रखी है जिससे वे किसी भी आपात स्थिति में उपयोग कर सकते हैं.

इसके बाद अगली एक और तस्वीर है जिसकी चर्चा खूब हो रही है. इसमें पीएम मोदी और सीएम नीतीश जो बाइडन और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के समक्ष ही एक दूसरे का हाथ पकड़े हुए गुफ्तगू करते हुए नजर आ रहे हैं. साथ में झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन भी हैं. खास बात यह है कि पीएम मोदी और नीतीश कुमार की पिछली मुलाकात बीते साल 25 मार्च 2022 में हुई थी. उत्तर प्रदेश सीएम योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में सीएम नीतीश कुमार और पीएम मोदी एक दूसरे के साथ दिखे थे. इसके बाद यह पहला मौका था जब दोनों आमने सामने हुए. राजनीति के लिहाज से इसमें विशेष यह कि दोनों की मुलाकातों में पुरानी गर्मजोशी भी दिखी.

दरअसल, पीएम मोदी से सीएम नीतीश की मुलाकात की इन तस्वीरों के सियासी मायने इसलिए भी हैं, क्योंकि हाल के दिनों में सीएम नीतीश कुमार को लेकर इंडिया गठबंधन में बहुत उत्साहजनक स्थिति नहीं कही जा रही है. इंडिया अलायंस की मुंबई बैठक से सीएम नीतीश कुमार जबसे लौटे हैं तब से उनका न तो कोई बड़ा बयान आया है और न ही उन्होंने इंडिया गठबंधन को लेकर कोई विशेष बात कही है. अब पीएम मोदी से उनकी इस गर्मजोशी भरी मुलाकात ने सियासी पारा अचानक चढ़ा दिया है.

राजनीति के जानकार कहते हैं कि विपक्षी एकजुटता के सूत्रधार रहे नीतीश कुमार को उम्मीद थी कि उन्हे इंडिया अलायंस का संयोजक बनाया जाएगा. लेकिन, न तो 23 जून की पटना बैठक और न ही 17 और 18 अगस्त की बेंगलुरु की बैठक में चर्चा ही हुई.इसके बाद 31 अगस्त और 1 सितंबर की मुंबई बैठक से पहले राजद सुप्रीमो ने जब से यह कहा कि कई संयोजक बनाए जाएंगे लिहाजा यहां भी इस पर कोई चर्चा नहीं हुई. अलबत्ता कुछ कमिटियां जरूर बनाई गईं लेकिन, माना जा रहा है कि इससे सीएम नीतीश खुश नहीं हैं. इसी बीच पीएम मोदी और नीतीश कुमार की मुलाकात ने सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Discover more from Muzaffarpur News

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading