पटनाः बिहार सरकार के विभागों को इंजीनियरों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी विभागों में इंजीनियरों के 66 फीसदी पद खाली पड़े हैं। बिहार इंजीनियरिंग सर्विसेज एसोसिएशन (बीईएसए) की ओर से जुटाए आंकड़ों के अनुसार, मंजूर किए गए 16 हजार 293 पदों में से केवल 5470 पद वर्तमान में भरे गए हैं। इसके चलते अभी भी 10 हजार 823 इंजीनियर के पद खाली पड़े हैं। इनमें जूनियर इंजीनियर के 7011 पद, असिस्टेंट इंजीनियर के 2523 पद, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के 936 और सुपरिटेंडिंग इंजीनियर के 277 पद खाली हैं।

मुख्य अभियंताओं के 69 पदों में से 65 पद खाली
सीनियर लेवल पर स्थिति और भी चिंताजनक है। मुख्य अभियंताओं के 69 पदों में से 65 पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा, सभी 11 इंजीनियर-इन-चीफ पद खाली पड़े हैं। बीईएसए के महासचिव राकेश कुमार के अनुसार, सरकार कार्यरत इंजीनियरों को अतिरिक्त प्रभार देकर स्थिति का प्रबंधन कर रही है। उन्होंने कहा कि इंजीनियरों पर काम का बोझ बहुत अधिक है। एक ही इंजीनियर को एक साथ कई पदों पर काम करना पड़ रहा है। राज्य ग्रामीण कार्य विभाग के एक कार्यकारी अभियंता अंजनी कुमार ने कहा कि जूनियर इंजीनियर और सहायक इंजीनियर के आधार पद के लिए भी रिक्तियां सामान्य से अधिक हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को जूनियर पदों पर नियमित रूप से भर्ती करनी चाहिए। हालांकि, एक नए बैच की भर्ती में देरी 8 साल तक है।

सरकार के किस विभाग में कितनी रिक्तियां
जल संसाधन विभाग में सबसे ज्यादा इंजीनियरों के पद खाली हैं, जबकि इस विभाग में सबसे ज्यादा काम इंजीनियरों के लिए होता है। इस विभाग में 3 हजार 743 रिक्तियां हैं। इसके बाद ग्रामीण कार्य विभाग में 1421, सड़क निर्माण विभाग में 1124, सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग में 989, भवन निर्माण विभाग में 814 और लघु जल संसाधन विभाग में 537 रिक्तियां हैं।
