सनातन धर्म के कठिन व्रतों में से एक है जितिया व्रत? जानें शुभ मुहूर्त और पारण का तरीका

बिहार : जितिया पर्व को सनातन धर्म में बहुत ही कठिन पर्व कहा जाता है, क्योंकि इसमें जल ग्रहण तक नहीं करती है. इस पर्व को करने वाली महिलाएं और महिलाएं अपने पुत्र की दीर्घायु होने की कामना से व्रत को करती है. आमतौर पर यह व्रत 24 से 36 घंटे का होता है, लेकिन इस बार एक विशेष संयोग के कारण एक दिन का ही यह पर्व बन रहा है. जानें इसके पीछे की और रोचक कहानियां.

जितिया व्रत कब है जाने व्रत पूजन की विधि | When is Jitiya Vrat? Know the method of fasting and worship.जितिया करने के लिए माछ और अरुआ का भक्षण किया जाता है. व्रत से एक दिन पूर्व यह करके रात में मतलब रात के अंतिम भाग में अर्थात सप्तमी में उठगन किया जाता है, जो इस वर्ष 6 अक्टूबर गुरुवार को होगा. जितिया व्रत जो होता है वह पूरा अष्टमी का मान होता है. उसके हिसाब से यह वर्त निर्धारित किया गया है.
7 अक्टूबर को जितिया व्रत का पारण
इसे महालक्ष्मी व्रत भी कहा जाता है. पूरे अष्टमी का मान इस बार शुक्रवार को 9:35 बजे के बाद शुरू होगा. यानी अष्टमी का आगमन होगा और अष्टमी शनि अर्थात 10:32 बजे शनिवार तक अष्टमी का मान रहेगा. इसलिए 65अक्टूबर को जितिया व्रत प्रारंभ किया जाएगा और 7 अक्टूबर को पारण किया जाएगा.

खीर और अंकुरी से करें पारण
पारण खीर और अंकुरी से करना परस्त माना गया है. यह व्रत स्त्री अपने संतान की आयु वृद्धि के लिए कामना से करती है. इस वर्त में मरुआ की रोटी मारा माछ और नोनी के साग का विशेष महत्व माना गया है.

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