किसी ने 365 तो किसी ने 108 दीपक जलाकर पितृों के परिजनों मनाई पितृ दीपावली

बिहार : पितृपक्ष के 14वें दिन त्रयोदशी तिथि के शाम को विष्णुपद फल्गु नदी के किनारे देवघाट पर पितृ दीपावली मनाए जाने की परंपरा है. इस दौरान पितरों के लिए दीप जलाकर खुशी मनाई जाती है. माना जाता है आज के दिन दीपदान करने से पितरों के स्वर्ग जाने का मार्ग प्रकाशमय हो जाता है. देवघाट के अलावे श्रद्धालु सूर्य मंदिर के पास दीप जलाकर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए कामना करते हैं. देश-विदेश से आये लोग अपने पितरों के लिए घी के दीये जलाते हैं, जिससे हजारों की संख्या में दीप जलने से पूरा देवघाट रोशनी से जगमग हो जाता है.

बिहार के गया में मनी पित्र दिवाली, जले लाखों दीये, जानें पितृपक्ष में क्या  है इसका महत्व? - pitra diwali in gaya lit millions of lamps know importance  in pitru paksha cgnt –पितृ दीपावली मनाने के लिए फल्गु तट पर जुटती है भीड़

14 वें दिन फल्गु नदी में स्नान करके दूध तर्पण करने का विधान है. इस दिन शाम यहां शाम को पितृ दीपावली मनायी जाती है. इसमें पितरों के लिए दीप जलाया जाता है और आतिशबाजी की जाती है. देश विदेश से आये श्रद्धालु पितृ दीपावली मनाने के लिए फल्गु तट पर आते हैं. उनके परिजन अपनी श्रद्धा के मुताबिक 1 हजार, 500, 365 या 108 दीप जलाकर पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित करते हैं. जिससे कि उन्हें यमलोक से सीधे स्वर्गलोक पहुंचाया जा सके उन्हें मोक्ष प्राप्ति हो सके.

पितरों को मोक्ष मिले इसी खुशी में मनी देव दीपावली

त्रिपाक्षिक श्राद्ध करने वाले तीर्थ यात्री त्रयोदशी तिथि के शाम में फल्गु तट पर स्थित देवघाट एवं सूर्यकुंड के पास घी के दीपक जलाये गये और पितरों के मोक्ष प्राप्ति पर जश्न मनाया गया. देश के कोने-कोने से आये श्रद्धालुओं ने पितृ दीपावली को उत्सव के रुप में मनाया और काफी खुश दिख रहें थे. छत्तीसगढ, झारखंड एवं अन्य राज्यों से आये श्रद्धालुओं ने दीपक जलाने के बाद अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि गयाजी में उनके पितरों को मोक्ष मिले इसी खुशी में देव दीपावली मना रहें हैं.

कैमरे में फल्गु तट के नजारे को कैद करते दिखे

देवघाट के अलावे पूरे विष्णुपद मंदिर क्षेत्र को भव्य तरीके से सजाया गया और रंग बिरंगे लाइट लगाई गई. वहीं फल्गू नदी पर बने रबड डैम का नजारा भी काफी देखने को बन रहा था. लोग अपने कैमरे में फल्गु तट के नजारे को कैद करते दिखे. बाहर से आए तीर्थ यात्रियों के अलावे स्थानीय गया के लोग भी इस पितृ दीपावली का नजारा देखने देवघाट आये हुए थे. मान्यता के अनुसार आश्विन कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को यमराज अपने लोक को खाली कर सभी को पृथ्वी लोक में भेज देते हैं. कहा जाता है कि सभी मनुष्य लोक पहुंच कर सभी प्रेत और पितर भूख से दुखी होकर अपने पापों के लिए माफी मांगते हैं. इसके अलावा अपने परिजनों से खीर खाने की कामना करते हैं. जिसके चलते ब्राह्मणों को खीर खिलाकर पितरों को मोक्ष दिलाया जाता है.

 

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