पूर्णिया : दुर्गा पूजा का माहौल चल रहा है. ऐसे में इस भक्ति के माहौल में इस लोक गायिका की आवाज सुन आप मंत्रमुग्ध हो जाएंगे. पूर्णिया रामबाग की रहने वाली कुमारी चांदनी शुक्ला लोकगीत, पारंपरिक गीत, मैथिली सहित भोजपुरी गीत संगीत में जलवा बिखेर रही है. वो विलुप्त हो रहे लोकगीत गीत गाने की शौकीन है. वहीं उनकी आवाज को सुनकर लोग उनके फैन हो जाते हैं. वह बताती है कि उन्हें बचपन से ही गाने और संगीत की दुनिया में जाने का शौक रहा. उनकी माता लोकगीत घर में गाती थी, पिता कुछ स्क्रिप्ट भी लिख दिया करते थे. वहीं से ये गुण आया है.
संगीत की कोई भाषा नहीं होती, उनके सुर बोलते हैं
चांदनी कहती हैं कि परिवार वालों का पूरा साथ मिलने के कारण वह लोकगीत गाने में अभी रुचि रखती हैं. वह कहती हैं कि संगीत की कोई भाषा नहीं होती, उनके सुर होते हैं. उनकी भाषा है वह कहती है कि वह बिहार की रहने वाली है और वह फोक स्पेशलिस्ट को गानों में रहती है. मैथिली और भोजपुरी गानों में वह ज्यादा ध्यान देती हैं, वह कहती है कि मैथिली कर्म क्षेत्र है और जन्म भोजपुरी क्षेत्र में हुआ है. इसलिए उन्होंने कर्म क्षेत्र यानी मिथिलांचल के पारंपरिक गीत और मिथिलांचल के विलुप्त हो रही लोकगीतों बचाने का प्रयास करती हैं.
घर में मिला पूरा सहयोग
पापा लिखते थे और मम्मी गाती थी, लेकिन वह लोग सीख नहीं पाए, लेकिन वह लोग चाहते थे कि उनकी बेटी सीखे और वह कहती है कि 1990 में उन्हें एक छोटा सा प्लेटफार्म मिला. जिसके सहारे उन्हें एक शिक्षक विजय कुमार दास जी के द्वारा उन्होंने उनके हाथ पड़कर उन्हें घर पर ले गया और उन्हें गाना संगीत की दुनिया से रु-बरू कराया और सीखना शुरू किया. उनके घर वालों का पूरा सहयोग मिला और धीरे-धीरे वह खुद गीत बनाकर लिखती हैं और साज बाज के साथ गाना की शुरुआत कर दी. वह प्रयास उनका लगातार जारी है और रहेगा. वह कहती है कि घर वालों का पूरा साथ मिला, उनके बिना कुछ भी संभव नहीं था, वह अब तक कहते हैं कि अब तक इन गानों के संगीत में और 2013 में बिहार को रिप्रेजेंट किया था. नेशनल यूथ फेस्टिवल में वहां पर उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर बिहार का नाम रोशन किया है.