नवरात्रि में चीजों को जगाने का क्या है महत्व? जानें इन्हे जगाने की विधि

बिहार : अलग-अलग राज्यों में नवरात्रि को लेकर अलग-अलग परंपराएं हैं. लोग अपने स्थानीय मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि का पूजन करते हैं. बिहार में नवरात्रि की पूजा बड़े ही खास अंदाज में की जाती है. यहां ऐसी कई परंपराएं हैं जो लंबे समय से चली आ रही है और इसकी धार्मिक मान्यताएं भी काफी अधिक है. उन्हीं में से एक है दुर्गा अष्टमी के दिन सामग्रियां को जगाने की परंपरा, जिसमें घर की महिलाएं नए वस्त्र सहित अन्य वस्तुओं को जगाती हैं. ऐसे में यह जानना आवश्यक है कि दुर्गा अष्टमी के दिन किन चीजों को जगाना सही है, और इसका सही तरीका क्या है.

नवरात्रि 2023: दुर्गा उत्सव में इन बातों का रखें विशेष ध्यान - Navratri 2023 Keep these things in mind during Navratriदुर्गा अष्टमी के दिन चीजों को जगाने के पीछे का खास अभिप्राय है. इस दिन नए कपड़े को जगाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि नए कपड़े को जगाने से वह माता दुर्गा के परिधान के रूप में परिणत हो जाता है और जिस प्रकार मां दुर्गा के वस्त्र में कभी किसी प्रकार का दाग नहीं नजर आता है वैसे हीं जगे हुए कपड़ों को पहनने वाले लोगों के जीवन में भी किसी प्रकार का कोई दाग नजर नहीं आता है. इतना ही नहीं चीजों को जगाने से उसके अनवरत विकास की भी मान्यता है और यही कारण है कि दुर्गा अष्टमी के दिन चीजों को जगाने की परंपरा है.

चीजों को किस प्रकार जगाना है उचित

दुर्गा अष्टमी के दिन घर की महिलाओं को चाहिए कि वह अरवा चावल को पानी में भिगोकर उसे पीस ले और उसका एक गाढ़ा घोल (चौरठ) तैयार करे. जिसमें हल्दी मिलाकर उसे उन चीजों पर छिड़कना चाहिए. उसी घोल को कपड़ों के साथ-साथ घर के अन्य सामग्री पर भी छिड़का जाता है. लोग उसे अपने खेत में लगे फसलों पर भी छिड़कते हैं, ताकि उसकी पैदावार बरकरार रहे. ऐसी कोई भी वस्तु नहीं है जिस पर उसका छिड़काव नहीं कर सकते हैं. दुर्गा अष्टमी के दिन तैयार वह घोल अत्यंत शुभ और लाभकारी होता है.

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