लोक आस्था और नेम निष्ठा का महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान शुक्रवार को नहाय खाय के साथ शुरू हो गया। इसके बाद आज दूसरे दिन खरना पूजा होगी। शनिवार को 12 घंटे का निर्जला उपवास रख कर व्रती खरना करेंगे। देर शाम पूजन के बाद प्रसाद ग्रहण करेंगे। इसके बाद 24 घंटे का निर्जला उपवास शुरू होगा। मिट्टी के चूल्हे पर खरना का प्रसाद बनाया जाएगा।

मुजफ्फरपुर में छठ घाट पर बच्चों को पोलियो की खुराक दी जाएगी। इस दौरान घाट पर कई चिकित्सक भी मौजूद रहेंगे।

खरना के मौके पर कहीं घाट पर तो कहीं घर की छतों पर व्रती महिलाएं छठ का प्रसाद तैयार करने के लिए गेहूं धोकर सुखाने में जुटी रहीं। कहीं-कहीं सामूहिक रूप से गेहूं सुखाती महिलाएं दिनभर बैठकर निगरानी करती रहीं, ताकि कोई पक्षी उसमें चोंच न लगा दे। इस दौरान उन लोगों ने मंगल गीत गाए। चारों ओर पूजा का उल्लास और उत्साह बना हुआ है।

खरना के दिन महिलाएं उपवास रखती हैं और शाम को मिट्टी के नए चूल्हे पर आम की लकड़ी द्वारा गुड़ की खीर का प्रसाद बनाती हैं। इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद से ही निर्जला व्रत की शुरुआत हो जाती है। जिसका पारण (व्रत खोलना) अगले दिन सूर्य देने के बाद ही किया जाता है।
खरना के दिन सूर्य उदया का समय सुबह 06 बजकर 46 मिनट पर होगा। वहीं सूर्यास्त का समय शाम 05 बजकर 26 मिनट रहेगा।
खरना पूजा पर छठ व्रती को इन बातों का रखना चाहिए ध्यान
खरना वाले दिन पूरे घर की साफ सफाई से होनी चाहिए।
खरना का प्रसाद उसी जगह बनाएं जहां कभी किसी ने भोजन नहीं किया हो।
मिट्टी का घर है तो उसे गोबर से अवश्य नीपें
छठ के चारों दिन प्याज लहसून का सेवन न करें।
महिलाओं को खरना के दिन से ही जमीन पर कपड़ा बिछाकर सोना चाहिए।