भगवान ब्रह्मा, विष्णु और सरस्वती ही नही, इन देवता को भी प्रिय है कमल..

 

गया : सनातन धर्म में कमल के फूल का खास महत्व तो है ही बौद्ध धर्म में भी इसकी विशेषता बताई गई है. बौद्ध श्रद्धालु भी भगवान बुद्ध को कमल का फूल अर्पित करते हैं. कमल का फूल पवित्रता का प्रतीक है और बौद्ध धर्म में इसे अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है.

बौद्ध धर्म के अनुसार, कमल का फूल आध्यात्मिकता और अनासक्ति का प्रतिनिधित्व करता है. कमल के फूल को प्रेरणा के प्रतीक के रूप में लिया जाता है. यह हमें आपके भौतिक दर्शन और अभिमानों से ऊपर के ऐतिहासिक आनंद और निर्वाण प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है.

अखिल भारतीय भिक्षु संघ के महामंत्री भिक्षु प्रज्ञादीप बताते हैं कि बौद्ध धर्म में कमल के फूल का अपना विशेष महत्व है. जिस प्रकार कमल कीचड में उगकर भी कीचड से उपर होता है. ठीक उसी प्रकार यह संसार भी एक प्रकार का कीचड़ है, जहां कई तरह के गलत कार्य हो रहें हैं.

इसी कीचड़ में बिना गलत कार्य के बिना क्लेश, बिना हिंसा के कमल के फूल की तरह उपर आकर अपनी सुंदरता बिखरते रहना है. कमल लोकमानस को निर्मलता, समृद्धि होते हुए भी अनाशक्ति, प्रकाश की ओर उन्मुख, विश्व में चतुर्दिक दिव्य गुणों की सुरभि फैलाने का ज्ञान देता है.

जानिए कमल फूल की कैसी हुई उत्पत्ति

हिन्दू पुराणों के अनुसार कमल के फूल की उत्पत्ति भगवान विष्णुजी की नाभि से हुई है. कमल के फूल से ब्रह्माजी की उत्पत्ति मानी जाती है. कमल के पुष्प को ब्रह्मा, लक्ष्मी तथा सरस्वती जी ने अपना आसन बनाया है. शास्त्रों के अनुसार कमल के फूल की ही तरह सृष्टि और इस ब्रह्मांड की रचना हुई है और यह ब्रह्मांड इसी फूल की ही तरह माना जाता है. सनातन धर्म में होने वाले अनेक प्रकार के यज्ञों व अनुष्ठानों में कमल के पुष्पों को निश्चित संख्या में चढ़ाने का विधान है.

कमल के फूल को धारण करने से शरीर शीतल रहता है. कहा जाता है कमल का फूल जल से उत्पन्न होकर कीचड़ में खिलता है परंतु वह मानव को दोनों से निर्लिप्त रहकर वह पावन जीवन जीने की प्रेरणा देता है. अर्थात बुराई व गंदगी के बीच रहकर भी व्यक्ति अपनी मौलिकता और पवित्रता को बनाए रख सकता है.

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