बिहार: वर्ल्ड पर्यटक स्थल मैप पर तेजी से उभर रहा है मशहूर केसरिया बौद्ध स्तूप

बिहार : वैश्विक स्तर पर अपनी भव्यता के लिए मशहूर केसरिया बौद्ध स्तूप पर्यटन के मानचित्र पर भी तेजी से उभर रहा है। पर्यटक स्थल के रूप में विकसित हो रहा केसरिया केवल स्तूप तक ही सीमित नहीं हैं। यहां पर्यटन के विकास की असीम संभावनाएं हैं। केसरिया और इसके आसपास ऐसे अनेक स्थल हैं जो ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के हैं। इनके विकास से न सिर्फ पर्यटन को मजबूती मिलेगी बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। जरूरत है इस दिशा में सकारात्मक कोशिश की। केसरिया स्टेट हाईवे एवं राष्ट्रीय राजमार्ग से भी जुड़ा है।

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निकट भविष्य में रेल सेवा भी उपलब्ध होगी। किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए सुगम यातायात को मजबूत आधार माना जाता है। रही बात आगामी 28, 29 एवं 30 नवंबर को कला संस्कृति एवं युवा विभाग बिहार सरकार द्वारा आयोजित हो रहे केसरिया महोत्सव की, ताे इस क्षेत्र के विकास में इसका भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आज भी स्थानीय लोगों की अपेक्षाएं महोत्सव से जुड़ी हुई हैं।

रामजानकी पथ से विकास को मिलेगी गति

भारत सरकार द्वारा स्वीकृत रामजानकी पथ केसरिया से होकर गुजरता है। इस परियोजना को आगे बढ़ाने पर काम चल रहा है। अयोध्या से जनकपुर तक बनने वाले इस पथ के आकार लेते ही इस क्षेत्र की तश्वीर एवं तकदीर दोनों बदल सकती है। आस्था एवं इतिहास को जोड़ने वाला रामजानकी पथ पर्यटन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है। इस पथ से केसरिया के समीप कैथवलिया में बन रहे विराट रामायण मंदिर का भी सीधा जुड़ाव हो रहा है। अध्योध्या से जनकपुर जाने के क्रम में श्रद्धालु केसरिया स्तूप के साथ ऐतिहासिक केशरनाथ मंदिर एवं विराट रामायण मंदिर के दर्शन का भी लाभ उठा सकेंगे।

केसरिया का विशाल बौद्ध स्तूप - Live History India

अन्य महत्वपूर्ण स्थलों के विकास की दरकार

बेहतर पर्यटक स्थल के रूप में केसरिया को विकसित करने के लिए यहां तमाम संभावनाएं हैं। ऐसे अनेक स्थल हैं जो देश-विदेश के पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र हो सकते हैं। इनमें केशरनाथ शिव मंदिर एवं ऐतिहासिक स्थल रानीवास भी शामिल है। केशरनाथ शिवलिंग का इतिहास से गहरा जुड़ाव है।

1970 में नहर की खुदाई के दौरान मंदिर के भग्नावशेष के साथ विशाल शिवलिंग मिला था। उसे ही केशरनाथ महादेव का नाम दिया गया। इसी तरह स्तूप के समीप स्थित रानीवास भी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है। इसके उत्खनन एवं संरक्षण से पर्यटन का नया आयाम तैयार होगा। वर्ष 2018 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के द्वारा इस स्थल की खोदाई शुरू की गई थी। इस दौरान ऐतिहासिक महत्व के अनेक भग्नावशेष मिले थे। हालांकि, तकनीकी कारणों उत्खनन कार्य रोक दिया गया और खोदे गए हिस्से को ढक दिया गया। निकट भविष्य में इसकी खोदाई फिर शुरू हो सकती है।

प्रतिदिन आते हैं सैकड़ों पर्यटक

बौद्ध स्तूप की भव्यता को करीब से देखने की चाह लिए प्रतिदिन सैकड़ों देशी-विदेशी सैलानी केसरिया पहुंचते हैं। इनमें थाईलैंड, म्यामार, श्रीलंका, कोरिया, ताइवान, जापान, मलेशिया आदि देशाें के पर्यटक शामिल होते हैं। हालांकि इनके लिए अभी आधारभूत संरचनाओं की कमी है। बिहार सरकार द्वारा इस दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। पर्यटन विभाग द्वारा पांच एकड़ भू-भाग में करीब छह करोड़ रुपये की लागत से आवासीय सुविधायुक्त कैफेटेरिया का निर्माण किया जा चुका है। वहीं, पर्यटक सुविधा केंद्र स्थापित करने की भी योजना है।

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