बिहार : मिथिलांचल को नदियों की समूह से भी जाना जाता है. इसी मिथिलांचल से बहने वाली कमला नदी को लोग मां गंगा के समान पूजते हैं. इस पवित्र नदी को मिथिलांचल क्षेत्र में जीवन दायिनी नदी भी कही जाती है. यही वजह है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन लाखों श्रद्धालु इस पवित्र बहती नदी में श्रद्धा की डुबकी लगाते हैं. मान्यता है कि इस नदी में श्रद्धापूर्वक डुबकी लगाने से संतान सुख की प्राप्ति होती है.
कामना की डुबकी लगाते ही होगी संतान सुख की प्राप्ति
मिथिलांचल में कमला नदी का विशेष महत्व है, जो संतान की प्राप्ति कामना रखने वाले दंपति दोनों पति-पत्नी इस कमला नदी में गठ जोड़ी कर गौसा घाट पर संतान प्राप्ति की कामना लिए डुबकी लगाते हैं. मतलब स्नान कर इस कमला नदी के गौशा घाट तट पर दान पुण्य करते हैं, तो निश्चित ही उसे संतान सुख की प्राप्ति होती है.
गंगा के समतुल्य पूजते हैं लोग
इस नदी की मान्यता मिथिलांचल क्षेत्र में काफी ज्यादा है. गंगा के समतुल्य लोग इस नदी को पूजते हैं. वैसे पूर्णिमा के दिन यहां विशेष श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है. खासकर कार्तिक पूर्णिमा में यहां लाखों श्रद्धालु डुबकी लगाने पहुंचते हैं. यही वजह है कि मां गंगा के समतुल्य मिथिलांचल के लोग इस पवित्र कमला नदी को मानते हैं. श्रद्धापूर्वक इसकी पूजा भी करते हैं.
बताते चले कि नेपाल से आई इस कमला नदी का स्रोत जयनगर होकर मिथिलांचल से गुजरती है. जबकि इसके समतुल्य जीवछ नदी भी मिथिलांचल के लिए उतना ही पूजनीय है, जिसका उद्गम स्थल मधुबनी जिले के खजौली प्रखंड के नरार पंचायत से सटे खेत में है. वहीं से यह नदी उत्पन्न होती है जो निरंतर बहती रहती है.