उत्तर बिहार का लाइफ लाइन कहा जाने वाले अस्पताल दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) के इमरजेंसी विभाग में मरीजों को दी जाने वाली ऑक्सीजन गैस गुणवत्तापूर्ण नहीं निकल रहा है। ऑक्सीजन की प्योरिटी सहित कई अन्य बिंदुओं पर जांच के लिए लगातार छह घंटे तक उन्हें चलाने का निर्देश दिया गया था। हालांकि तीनों प्लांट को रोक-रोककर चलाने के बावजूद वहां से जेनरेट होने वाली ऑक्सीजन की गुणवत्ता निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं रहने से उन्हें निर्धारित अवधि से पूर्व ही बंद कर दिया गया।

ऑक्सीजन प्योरिटी की जांच नहीं की जा सकी
बता दें कि इमरजेंसी व शिशु रोग विभाग सभी विभागों में स्थित पीएसए ऑक्सीजन प्लांट में मॉक ड्रिल के लिए अस्पताल उपाधीक्षक डॉ हरेंद्र कुमार के साथ प्रभारी अस्पताल प्रबंधक शंभुनाथ झा थे। इस दौरान जांच में खुलासा हुआ कि गायनी विभाग के प्लांट में ऑक्सीजन की प्योरिटी मात्र 64.2 फीसदी ही पाई गई। वहीं शिशु रोग विभाग में प्योरिटी मात्र 54 प्रतिशत ही पाई गई। प्लांट से प्रेशर भी जेनरेट नहीं कर पा रहा था। वहीं इमरजेंसी विभाग वाले प्लांट को चालू करने के दौरान बिजली के ट्रांसफ़र से आग निकलने के कारण प्लांट को बंद कर दिए जाने से इमरजेंसी प्लांट के ऑक्सीजन प्योरिटी की जांच नहीं की जा सकी। मानक के अनुसार किसी भी ऑक्सीजन की प्योरिटी कम से कम 90 प्रतिशत होने पर ही उसे मरीजों के उपयोग में लाया जा सकता है।
ऑक्सीजन फिलहाल मरीजों के उपयोग लायक नहीं है
इस सम्बंध में डीएमसीएच के उपाधीक्षक डॉ. हरेंद्र कुमार ने बताया कि प्लांट तो चल रहा है। लेकिन, जेनरेट हो रही ऑक्सीजन फिलहाल मरीजों के उपयोग लायक नहीं है। प्लांट के मेंटेनेंस के लिए बीएमएसआईसीएल से कई बार अनुरोध किया जा चुका है। बता दें कि इमरजेंसी और शिशु रोग विभाग के ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट के ठप रहने के चलते वहां ऑक्सीजन सिलेंडरों के माध्यम से मरीजों को आपूर्ति की जा रही है। ऑक्सीजन सिलेंडर की खरीद के लिए हर माह अस्पताल प्रशासन को लाखों की राशि खर्च करनी पड़ रही है। मेंटेनेंस के अभाव में तीनों प्लांट महीनों से ठप पड़े हुए हैं। मेनटेंस के लिए निर्धारित एजेंसियों की ओर से भारी-भरकम राशि की मांग की जा रही है। एजेंसी 75 प्रतिशत राशि अग्रिम मांग रही है। अस्पताल प्रशासन की ओर से प्लांट की मेंटेनेंस के लिए बीएमएसआईसीएल से कई बार अनुरोध कर चुका है।