शिक्षा विभाग के नए आदेश पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने जताई नाराजगी

एक दिन में पांच कक्षा संचालित नहीं करने वाले प्रोफेसरों के एक दिन का वेतन रोकने के फैसले पर वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने नाराजगी जताई है। शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग को नसीहत दी है कि शिक्षा विभाग विश्वविद्यालय के साथ विद्यालय की तरह व्यवहार नहीं करे। कॉलेज के शिक्षक विश्वविद्यालय सेवा आयोग के निर्देशों का पालन करते हैं। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय सेवा शिक्षक संघ के (भकुस्टा) अध्यक्ष प्रो. दिवाकर पांडेय ने कहा कि पांच घंटे कॉलेज परिसर में रहने का अर्थ शिक्षा विभाग समझ नहीं पाया है। पांच घंटे का मतलब पांच वर्ग नहीं है, बल्कि वर्ग संचालन के अलावा पुस्तकालय, शोध, सेमिनार आदि में गुजारना है। उन्होंने कहा कि यूजीसी के अनुसार, कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर को सप्ताह में 14 वर्ग और असिस्टेंट प्रोफेसर को 16 वर्ग संचालित करने होते हैं।

भकुटा ने दिया पूर्व के प्रविधानों का हवाला

भकुटा के अध्यक्ष प्रो. कन्हैया बहादुर सिन्हा ने कहा कि 29 जून 2005 को राज्य सरकार की अनुशंसा पर कुलाधिपति द्वारा सरकार के पत्र संख्या 995 दिनांक 28 मई 2005 के आधार पर कार्य भार परिनियम पर सहमति दी गई। यह वैधानिक प्रावधान अभी भी कायम हैं। जिनमें हालिया रेगुलेशन 2010 और 2018 भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यूजीसी ने प्रति वर्ष 52 सप्ताह के लिए कार्य भार को परिनियम और यूजीसी रेगुलेशन द्वारा अच्छी तरह से परिभाषित किया है। इसमें शिक्षण के लिए 30 सप्ताह, नामांकन, परीक्षा और पाठ्येतर गतिविधियों जैसे खेल, कालेज दिवस आदि के लिए 12 सप्ताह, वोकेशन के लिए आठ से 10 सप्ताह और सार्वजनिक छुट्टियों के लिए दो सप्ताह निर्धारित किया है।

 

उन्होंने बताया कि शिक्षक प्रतिदिन पांच घंटे रुकेंगे, जिसमें से दो घंटे सामुदायिक कार्य और पाठ्येत्तर गतिविधियों के लिए छात्रों के साथ विमर्श या पुस्तकालय अध्ययन और अनुसंधान के लिए समर्पित होंगे। सहायक प्रोफेसर के लिए शिक्षण प्रति सप्ताह 16 घंटे और एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के लिए 14 घंटे होंगे। अध्ययन सामग्री/व्याख्यान की तैयारी और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए प्रति सप्ताह दस घंटे आवंटित किए गए हैं। इस प्रकार प्रति सप्ताह 40 घंटे हैं। उन्होंने तीन दिनों तक गैर हाजिर रहने वाले विद्यार्थियों से स्पष्टीकरण मांगे जाने और नाम काटने के निर्देश को अव्यवहारिक बताया है।

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