बेतिया में माता रानी का एक ऐसा मंदिर है, जहां संतान से संबंधित सभी परेशानियां दूर होती हैं. इस मंदिर में खुद माता रानी उनके संतानों की रक्षा करती हैं. कई श्रद्धालुओं का तो यहां तक कहना है कि उनकी संतान को किसी नकारात्मक ऊर्जा ने जकड़ रखा था, जिसका निवारण इसी मंदिर में हुआ. बड़ी बात यह है कि इस मंदिर की चर्चा सिर्फ दिल्ली, यूपी सहित अन्य राज्यों तक है. यहां सोमवार, शुक्रवार, अमावस्या और पूर्णिमा को नकारात्मक ऊर्जा से पीड़ित का मेला लगता है. बिना किसी झाड़-फूंक या तंत्र-मंत्र के उनका इलाज किया जाता है. हालांकि, यहां श्रद्धालुओं से एक रुपया भी दान नहीं लिया जाता है.
लश्कारे वाली देवी मां का प्रसिद्ध मंदिर
बेतिया के हरिवाटिका और चेक पोस्ट के बीच हजारी पशु मेला परिसर के समीप लश्कारे वाली देवी मां का मंदिर है. इस मंदिर में माता के साथ भगवान शिव की भी पूजा की जाती है. पूरे शहर में यह मंदिर नकारात्मक ऊर्जा के निवारण के लिए प्रसिद्ध है. हालांकि इस बात का जिक्र होते ही मन में झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र के विचार आने लगते हैं. लेकिन इस मंदिर में ऐसा कुछ भी नहीं किया जाता है. मंदिर की देखरेख करने वाली महिला ने बताया कि यहां कई दशकों से ऐसे श्रद्धालु आते हैं, जिनके संतान जीवित नहीं रह पाते हैं. डॉक्टर के इलाज के बावजूद बच्चों का सेहत ठीक नहीं रहता है. बच्चे किसी अनजान वजह से परेशान रहते हैं. बकौल गुड़िया, कई मामलों में तो बच्चों की हालत इतनी बुरी होती है कि उनके मुंह से आवाज तक नहीं निकल पाती है. ऐसी स्थिति में भी यहां आने के बाद वे बिल्कुल ठीक हो जाते हैं.
संतान संबधित समस्याओं का होता है निवारण
मंदिर में मौजूद महिला बताती हैं कि उनका घर नौतन प्रखंड में है. बावजूद, वह पिछले 8 वर्षों से पूरे परिवार के साथ मंदिर के आश्रम में ही रह रही है. खुद उनकी पांच संतान की मौत गई. किसी की उम्र 4 महीने, तो कोई 5 वर्ष का था. उन्हें न तो कोई गंभीर बीमारी थी और न ही कोई अन्य समस्या.माता रानी के इस मंदिर में आने के कुछ समय बाद उन्हें दो और संतान हुए. जिनकी उम्र 5 और 7 वर्ष हो चुकी है. वे दोनों बिल्कुल निरोग हैं.