मुजफ्फरपुर : 10 दिसंबर रविवार को को बाबू अयोध्या प्रसाद खत्री साहित्यिक सेवा संस्थान के तत्वावधान में 175 भी रविवासरीय मासिक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। साथ ही इस उपलक्ष में गांधी पुस्तकालय के सौजन्य से पुस्तकालय सदन में कवियों शायरों को साहित्यिक उपलब्धि के निहितार्थ गांधी साहित्य सेवा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जहां 175वीं कवि गोष्ठी की अध्यक्षता साहित्य जगत के मुजफ्फरपुर के शिरोमणि डॉक्टर संजय पंकज ने किया, मंच संचालन डॉक्टर विजय कुमार मिश्रा और धन्यवाद ज्ञापन डॉक्टर विजय कुमार जायसवाल ने किया।

सर्वप्रथम कार्यक्रम की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम समन्वयक आलोक कुमार अभिषेक ने बताया कि वर्षों से कविता शायरी करते हुए कवियों ने अपनी साधना का विस्तार किया है कविता और साहित्य रचना संपूर्ण मानवता को उज्जवलता प्रदान करता है। उनकी पंक्तियां समाज में रचनात्मक परिवर्तन का वाहक होती है। इसी को दृष्टिगत करते हुए श्री गांधी पुस्तकालय ने प्रमुख कवियों शायरों को गांधी साहित्य सेवा से सम्मानित करने का अपना महान दायित्व पूरा किया है।
पुस्तकालय के अध्यक्ष धर्मनाथ प्रसाद ने बताया कि ऐतिहासिक गांधी पुस्तकालय में वाचनालय के अतिरिक्त कवि गोष्टी, व्याख्यान माला, योग एवं होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा जैसा कार्य किया जाता है। वहीं मुख्य अतिथि सह आयोजन समारोह की अध्यक्षता के क्रम में श्रेष्ठ ,साहित्यिक जगत के गौरव एवं शिखर पुरुष डॉक्टर संजय पंकज ने कहा कि जब तक मूल्य और मनुष्यता की बात होती रहेगी कविता की यात्रा चलती रहेगी। मुजफ्फरपुर की रचना शीलता पूरे देश में सम्मानित होती है।


आत्मीयता और भाईचारा को साहित्य खुला आसमान और हरी धरती प्रदान करता है, कविता केवल शब्दों का संवाद नहीं है। वह तो हृदय की संवेदना और आत्मा की भाषा है। गीत मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति है। मासिक कभी गोष्टी ने मुख्य रूप से डॉक्टर संजय पंकज, शुभ नारायण शुभंकर, आलोक कुमार अभिषेक ,कुमार विरल, डॉक्टर विजय शंकर मिश्रा, दिन बंधु आजाद, उमेश राज, राम उचित पासवान ,मोहन कुमार सिंह मधुकर बनमली, अंजनी कुमार पाठक, सौरभ प्रभात, विजय शंकर प्रसाद अरुण कुमार तुलसी, यशपाल कुमार, सुमन कुमार मिश्रा, रामवृक्ष चक पूरी ,शशि रंजन वर्मा ,रघुनाथ पुरिया, ओमप्रकाश गुप्ता, राम कुमार यादव, संतोष कुमार सिंह एवं अन्य कवियों शायरों ने संबोधित किया उपयुक्त सभी कवियों को गांधी साहित्य सेवा सम्मान से अलंकृत करके श्री गांधी पुस्तकालय ने साहित्य की प्रतिष्ठा को समाज एवं मनुष्यता की प्रकृति से जोड़ने का शुभ कार्य किया।
