नए साल के आने में महज 10 दिन का वक्त रह गया है ऐसे में लोग अभी से ही पिकनिक स्पॉट और नए साल के स्वागत के जश्न के लिए अच्छी जगहों को ढूंढ रहे हैं. आपको बता दें कि बिहार के मशहूर राजगीर के बारे में जो टूरिस्ट के बड़े स्पॉट के रूप में जाना जाता है. राजधानी पटना से करीब 95 किलोमीटर दूर नालंदा का अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल राजगीर पर्यटकों को घूमने के लिए काफी महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है. यहां कई ऐतिहासिक स्थल हैं जो आज भी देखने लायक हैं.

बिहारशरीफ मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर राजगीर में वैभव गिरी पर्वत के तलहटी में ब्रह्मकुंड है, जहां बरसात के समय पहाड़ो में जमा पानी जो कि सल्फर, गंधक के सहारे गर्म होकर सप्तधारा से गिरती है. उसी गर्म पानी में पर्यटको को स्नान करने के लिए सबसे अच्छा स्थान माना जाता हैं. यहां गर्म पानी में स्नान कर थकावट दूर कर सकते हैं. इसी प्रकार राजगीर ब्रह्म कुंड के पास ही पर्यटकों के लिए जापानी मंदिर, वेणुवन बिहार, पांडु पोखर भी है.

ब्रह्मकुंड परिसर से ही करीब डेढ़ किलोमीटर दूर वन विभाग और जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा 19 करोड़ की लागत से 500 एकड़ में विकसित नेचर सफारी फैली हुई है. यह राजगीर-जेठियन मार्ग पर स्थित है. इसमें विभिन्न मनोरंजक सुविधाओं में सस्पेंशन ब्रिज, जिप लाइनिंग, रॉक क्लाइंबिंग वाल , तीरंदाजी रेंज, कुश्ती क्षेत्र, बस टावर चिल्ड्रन पार्क शामिल है.

इसमें मुख्य आकर्षण का केंद्र जो कि कांच का पुल राजगीर ग्लास ब्रिज है. ये 200 फीट ऊंचा और 85 फीट लंबा है. इस पर एक बार में करीब 40 पर्यटक चढ़कर सैर कर सकते हैं. इसके अलावा नेचर सफारी के अंदर मुख्य गेट पर भगवान बुद्ध की बनाई गई आकर्षक तस्वीर से भी रूबरू होते हैं. राजगीर के जू सफारी में भालू, तेंदुआ, हिरण, बाघ ,शेर, जैसे जंगली जानवर मौजूद हैं, जिन्हें पर्यटक एसी बस में सुरक्षित बैठकर इन जंगली जानवरों का दीदार करते हैं.

यहां घूमने के लिए ऑनलाइन, ऑफलाइन करीब 250 से ऊपर प्रति पर्यटक टिकट कटाना पड़ता है. इतना ही नहीं इसी जगह के आसपास जरासंध अखाड़ा है, जो कि मगध सम्राट के राजा जरासंध को महाभारत के दौरान भीम ने दो भागों में फाड़ कर हराया था, वह स्थल आज भी मौजूद है जिसे लोग देखने आते हैं. स्वर्ण भंडार के प्रवेश द्वार पर गुप्त भाषा में लिलहे शिलालेख आज भी राज बना हुआ है.

मनियर मठ भी राजगीर के दर्शनीय स्थल में से प्रसिद्ध स्थान माना जाता है. यह राष्ट्रीय हित का स्मारक है. इसे जैन मंदिर के रूप में डिजाइन किया गया है लेकिन यह जैन मंदिर नहीं है. यह शीलभद्र नाम के एक साधु को समर्पित है जो एक करोड़पति थी. कहा जाता है कि इसमें कई बेसकीमती रत्न दबे हुए हैं लेकिन उनका पता नहीं लगाया जा सकता है.