दही खाने के मामले में रह गए पीछे यूपी-झारखंड वाले, 3 मिनट में खा लिया इतना किलो दही

बिहार के आरा में एक अजीबोगरीब प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. ‘दही खाओ इनाम पाओ…’ इस प्रतियोगिता में महिला और पुरुष प्रतिभागी शामिल हुए. इसमें तीन मिनट में जिसने ज्यादा दही खाया, उसे विजेता घोषित किया गया. आरा के कतीरा में मौजूद शाहबाद दुग्ध उत्पादक डेयरी में ये प्रतियोगिता का आयोजन हुआ. इसमें बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, लेकिन सब पर भारी बिहारी रहे. महिला हो या पुरुष दोनों वर्ग में विजेता आरा के प्रतिभागी हुए. इसमें पुरुष वर्ग में भोजपुर के ही कसाप गांव राजेश कुमार ने 2.655 केजी दही व महिला वर्ग में इसाढ़ी कीमीरा देवी ने 1.540 किलो ग्राम दही खाई.

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200 से अधिक प्रतिभागियों ने कराया था रजिस्ट्रेशन
‘दही खाओ इनाम पाओ’ प्रतियोगिता में 200 से अधिक प्रतिभागियों द्वारा भाग लेने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया गया था. प्रतियोगिता में बिहार, झारखंड एवं अन्य राज्यों से आये हुए प्रतिभागियों ने भाग लिया. महिला और पुरुष दोनों के लिए अलग-अलग प्रतियोगिता का आयोजन हुआ. लगभग 150 प्रतिभागियों ने इसमें हिस्सा लिया और तय समय में ज्यादा से ज्यादा दही खाने का प्रयास किया.  पुरुष वर्ग में अधिकतम 2 किलो 655 ग्राम दही एक व्यक्ति ने खाया और वह प्रथम विजेता बने..

जानिए किसने कितना खाया दही
पुरुष वर्ग में भोजपुर के ही कसाप गांव राजेश कुमार ने तीन मिनट में 2.655 किलो ग्राम दही खाकर पहले नम्बर पर रहे. दूसरे नंबर पर भोजपुर के शाहपुर गांव के रौशन कुमार रहे जिन्होंने 2.273 किलो ग्राम दही खाया. वहीं तीसरे पायदान पर भोजपुर उदवंतनगर गांव के पुरषोत्तम कुमार ने 2.159 किलो ग्राम दही खाया.महिला वर्ग में इसाढ़ी के मीरा देवी तीन मिनट में 1.540 किलो ग्राम दही खाई और पहले स्थान पर रही. दूसरे नंबर पर दुल्हीनगंज की सरस्वती देवी रही जिन्होंने 1.533 किलो ग्राम दही खाई. तीसरे नंबर पर बक्सर जिला के तेतरह गांव की रूबी देवी रही. उन्होंने 1.247 किलो ग्राम दही खाई.

जानिए क्या कहा आयोजक ने
प्रतियोगिता का नेतृत्व कर रहे है आरा सुधा डेयरी के प्रबंधक धनंजय कुमार ने बताया कि सुधा की गुणवता पर ग्राहकों का अटूट विश्वास है. सुधा पूरी शुद्धता के साथ आप सभी ग्राहकों के स्वास्थ्य का भी ख्याल रखता है. ग्रामीण क्षेत्र से लेकर पैकेजिंग तक दूध को हाथ से नहीं छुआ जाता है. यह पूरी तरह से गांव के किसानों द्वारा संचालित व्यवसाय है जिसमें उपभोक्ताओं से सुधा दूध एवं दुग्ध उत्पाद को बिक्री का लाभ सीधे किसानों को प्राप्त होता है.

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